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दिव्यतपस्वी आ. हंसरत्नसूरिजी ने छह महीने के उपवास में 7वीं बार 16 उपवास का पच्चखाण लिया – पं. राजरक्षितविजयजी

maharashtra jain warta • Maharashtra Jain Warta, MJW - Social News, News Slider, Other, Social • January 8, 2024

पुणे : श्री संभवनाथ जिनालय गुलटेकडी जैन संघ मे पंन्यास राजरक्षितविजयजी ओर पंन्यास नयरक्षितविजयजी आदि की पावन निश्रा में पुरुषादानिय पार्श्वनाथ परमात्मा का 2830 वां दीक्षा कल्याणक मनाया गया।

इस दिन को चिह्नित करने के लिए एक सामूहिक सामायिक का आयोजन किया गया था।
पं. राजरक्षितविजयजी ने भरी सभा में बताया कि पार्श्वकुमार ने 30 वर्ष की भरी योवन में विश्व कल्याण के लिए 388 करोड़ का सोना खुले हाथो दान कर दिया और 300 राजकुमारों के साथ संयम धारण किया। यदि श्री पार्श्वकुमार हाथ जोड़कर सभी पापों का व्रत ले सकते हैं, तो हम भी प्रमुख पापों का व्रत क्यों नहीं ले सकते? प्रतिज्ञा एक बंधन नहीं बल्कि एक सुरक्षा है। जैसे ब्रेक के बिना गाडी, लगाम के बिना घोड़ा खतरनाक है, प्रतिज्ञा के बिना जीवन व्यर्थ है। दीक्षा के बाद, पार्श्व प्रभु ने साधना में समता भाव की सिध्दि प्राप्त की, आईए आज भगवान पार्श्व से प्रार्थना करें…
भगवान श्री पार्श्वनाथ की भक्ति जीवन में पांच पी की प्राप्ती की(1) पुण्यवृद्धि (2) पापक्षय (3) पद्मा (लक्ष्मी) (4) प्रज्ञा (शुद्ध बुद्धि) (5) परमपद। श्री गोडी चिंतामणि जैन संघ आ. अक्षयबोधिसूरिजी, आ. महाबोधिसूरिजी, पं राजरक्षितविजयजी आदि साधु – साध्वी की पावननिश्रा मे श्री प्रेम भुवनभानुसुरी समुदाय के दिव्य तपस्वी आ.हंसरत्नसूरिजी महाराज ने अपने छह माह के लगातार उपवास के तहत 16 दिन का सातवां पच्छखान ग्रहण किया तो वातावरण “तपस्वी अमर रहो” के नारे से गूंज उठा।

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