अंदर से प्रकाशित हों : प. पू. प्रवीणऋषिजी म. सा.
महाराष्ट्र जैन वार्ता पुणे : जन्म लेने के बाद जो जीवन हम जीते हैं, क्या हमें वास्तव में उसका अर्थ समझ में आता है? जीवन का असली अर्थ जाने बिना जीते रहना, ऐसा है जैसे पीठ पर भारी बोझ उठाकर चलना। ऐसे बोझ से कभी न कभी हमारी सांसें थक ही जाती हैं। हम जो … Read more