परिवर्तन चातुर्मास में अभिनव प्रयोग
नवकार कलश पाकर पाँच श्रद्धालु हुए गौरवान्वित
महाराष्ट्र जैन वार्ता
पुणे : परम पूज्य उपाध्याय प्रवर श्री प्रवीणऋषिजी म.सा. (आदीठाणा) के पावन सान्निध्य में परिवर्तन चातुर्मास 2025 के अंतर्गत संवसरी महापर्व के अवसर पर अखंड नवकार महामंत्र जप का भव्य आयोजन किया गया।
इस महामंत्र जप में श्रद्धालुजनों ने भावपूर्वक भाग लिया। विशेष रूप से, अखंड आठ दिनों तक नवकार महामंत्र का जप नवकार मंत्र के पावन कलश के समक्ष निरंतर चलता रहा। इस कलश के साथ कुछ सिल्वर कॉइन भी अर्पित किए गए थे।
महान कलश किसे प्राप्त होगा, इस विषय पर संघ ने विचार कर लिलाव की परंपरा न अपनाते हुए लकी ड्रॉ की पद्धति से निर्णय लिया। इसमें पाँच भाग्यशाली भक्तों को यह पावन कलश प्राप्त हुआ।
आज इस लकी ड्रॉ में विजयी पाँचों श्रद्धालुओं को विशेष सन्मानपूर्वक कलश प्रदान किए गए। इस अनोखी पद्धति से कलश प्रदान करने के निर्णय के लिए समस्त जैन समाज में आदीनाथ संघ की भूरी-भूरी प्रशंसा हो रही है।
नवकार मंत्र की महिमा –
नवकार महामंत्र जैन धर्म का सर्वोपरि मंत्र है, जिसे सभी पापों का नाश करने वाला और आत्मा को शुद्ध करने वाला बताया गया है। इस महामंत्र के अखंड जप से आत्मा में शांति, पवित्रता और अनंत पुण्य का उदय होता है।
लकी ड्रॉ में विजयी श्रद्धालु –
सारिकाजी खटेड़
महेंद्रकुमारजी खाबिया
आनंदजी मुथा
संजयजी ललवाणी
सावलचंदजी बाफना
