जो भी करो, श्रेष्ठ करो : प. पू. प्रवीणऋषिजी म. सा.
महाराष्ट्र जैन वार्ता पुणे : कोई भी कार्य करते समय उसे अधूरा या रक्षित करके नहीं करना चाहिए। वहाँ भी आपका सौ प्रतिशत देना आवश्यक है। जो भी करें, उसे सर्वोत्तम रूप में करें। बिना कुछ भी पीछे रखे, अपनी पूरी क्षमता के अनुसार श्रेष्ठतम देना ही वास्तव में सौ प्रतिशत प्रयास करना होता है … Read more