प्रभु का वचन जीवन का दर्शन : प. पू. प्रवीणऋषिजी म. सा.
महाराष्ट्र जैन वार्ता पुणे : प्रभु शाश्वत हैं। प्रभु नित्य हैं। शरीर मात्र नश्वर है। जब शरीर का आकर्षण समाप्त हो जाता है, तब अन्य किसी वस्तु का आकर्षण नहीं रह जाता। जब भीतर का विवेक जागृत होता है, तब हम सर्वज्ञ और सर्वदर्शी बन जाते हैं। इंद्रभूति गौतम की भक्ति का अद्भुत उदाहरण हमें … Read more