माता-पिता पुण्य से ही मिलते हैं : पं. राजरक्षितविजयजी
विहारयात्रा में बड़ी संख्यामें भोर के युवा भी शामिल महाराष्ट्र जैन वार्ता पुणे : हमारे भारत देश में “मातृ देवो भव, पितृ देवो भव, अतिथि देवो भव” के नारे हमारे घरों में गूंजते थे। लेकिन मैकोले शिक्षा पद्धति के प्रसार, पश्चिमी जीवन शैली के आकर्षण से मनुष्य स्वार्थी- कृतघ्नी और एकलपेटा हो गया है। पत्नी … Read more