अच्छा करके पछताना नहीं, दुख देकर आनंद नहीं : प. पू. प्रवीणऋषिजी म. सा.
महाराष्ट्र जैन वार्ता पुणे : भावनाओं से ही विचारों की शुरुआत होती है। प्रारंभ में भावनाएँ मन और विचारों पर प्रभाव डालती हैं, और बाद में विचार भावनाओं पर अपना वर्चस्व स्थापित कर लेते हैं। यह जीवन का एक कटु सत्य है। सुबह उठते ही यदि हम तीर्थंकरों की अनुभूति को आत्मसात करें, तो वह … Read more