अपने अज्ञान को स्वीकारें : प. पू. प्रवीऋषिजी म. सा.
महाराष्ट्र जैन वार्ता पुणे : अपने अनुभवों की सीमित चौखट में ही जीते हैं और उसी दृष्टि से संसार को देखते हैं। जो घटनाएँ हमारी नजरों से ओझल रहती हैं, उन्हें हम सत्य नहीं मानते; हमें जो सामने दिखाई देता है, वही पूर्ण सत्य है—ऐसा हम सोचते हैं। इसका अर्थ यह है कि हम जिस … Read more