संस्कार, संयम और साधना की प्रेरणा रहे प. पू. प्रीतिसुधाजी म.सा का देवलोक गमन
महाराष्ट्र जैन वार्ता
पुणे : जैन समाज के लिए अत्यंत भावुक क्षण में संस्कार, संयम और साधना की सशक्त प्रेरणा स्वरूप प. पू. प्रीतिसुधाजी म.सा का शुक्रवार, दिनांक 01 मई 2026 को प्रातः 1:12 बजे संथारा सहित शांतिपूर्वक देवलोक गमन हो गया। उनके देवलोक गमन की सूचना मिलते ही पुणे सहित विभिन्न क्षेत्रों में शोक की लहर फैल गई है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उनके अंतिम दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।
प. पू. प्रीतिसुधाजी म.सा अपने संयममय जीवन, प्रभावशाली प्रवचनों और संस्कारपूर्ण वाणी के लिए विशेष रूप से जानी जाती थीं। उन्होंने अपने जीवनकाल में जैन धर्म के मूल सिद्धांत अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह और तप का व्यापक प्रचार-प्रसार किया।
उनके सान्निध्य में अनेक लोगों ने धर्ममार्ग अपनाया और अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया। साध्वीश्री का संपूर्ण जीवन सादगी, त्याग और आत्मकल्याण का प्रेरणादायी उदाहरण रहा।
उनके अंतिम दर्शन (महासमाधि दर्शन) का कार्यक्रम आज प्रातः 7:00 बजे से 9:00 बजे तक वर्धमान प्रतिष्ठान, सेनापति बापट रोड, पुणे में आयोजित किया गया है, जहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। इसके पश्चात प्रातः 9:00 बजे डोली लोणीकंद के लिए प्रस्थान करेगी।
लोणीकंद स्थित क्षेत्रपाल प्रतिष्ठान में दोपहर 11:00 बजे से सायं 4:00 बजे तक दर्शन का लाभ श्रद्धालुओं को प्राप्त होगा। तत्पश्चात सायं 4:00 बजे अंतिम विदाई दी जाएगी, जिसमें समाज के अनेक गणमान्य व्यक्तियों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहेंगे और नम आंखों से उन्हें अंतिम प्रणाम करेंगे।
समाज के प्रमुख व्यक्तियों ने साध्वीश्री के देवलोक गमन को अपूरणीय क्षति बताते हुए कहा कि उनका आशीर्वाद, तप और मार्गदर्शन सदैव समाज को दिशा देता रहेगा। उन्होंने अपने जीवन से जो संस्कार दिए हैं, वे आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बने रहेंगे।
समस्त श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर दर्शन का लाभ लेने का विनम्र निवेदन किया गया है। प. पू. प्रीतिसुधाजी म.सा का त्यागमय जीवन और उनके उपदेश सदैव समाज को धर्ममार्ग पर अग्रसर करते रहेंगे।
