जैन समाज में शोक की लहर
महाराष्ट्र जैन वार्ता
पुणे : जैन समाज की पूज्य, प्रेरणास्रोत एवं सेवा, साधना तथा करुणा की प्रतिमूर्ति पद्मश्री प. पू. आचार्य श्री चंदनाजी म. सा., जिन्हें श्रद्धापूर्वक ‘पूज्य ताई माँ’ के नाम से जाना जाता था, का बुधवार 22 अप्रैल 2026 को प्रातः 10:50 बजे पुणे में शांतिपूर्वक निर्वाण हो गया। उनके देवलोकगमन के समाचार से संपूर्ण जैन समाज सहित देशभर के श्रद्धालुओं में गहरा शोक व्याप्त है।
प. पू. आचार्य श्री चंदनाजी म. सा. ने अपने संपूर्ण जीवन को मानव सेवा, आध्यात्मिक साधना, अहिंसा, करुणा और समाज कल्याण के लिए समर्पित किया। उन्होंने न केवल जैन धर्म के सिद्धांतों का प्रचार-प्रसार किया, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण एवं जरूरतमंदों की सेवा के अनेक कार्यों के माध्यम से समाज में अमिट छाप छोड़ी।
उनकी तपस्या, सादगी, त्याग और सेवा भावना के कारण वे देश-विदेश में लाखों श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा बनीं। उनकी महान सेवाओं और समाज के प्रति अतुलनीय योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें ‘पद्मश्री’ सम्मान से अलंकृत किया था। उनका व्यक्तित्व आध्यात्मिक ऊंचाइयों के साथ मानवीय संवेदनाओं का अद्भुत संगम था। वे सदैव प्रेम, शांति, सेवा और संस्कारों का संदेश देती रहीं।
उनके अंतिम दर्शन हेतु पार्थिव देह को शुक्रवार, 24 अप्रैल 2026 को प्रातः 10:00 बजे से दोपहर 3:00 बजे तक वर्धमान प्रतिष्ठान, सेनापति बापट रोड, पुणे में रखा जाएगा, जहां श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित होकर अपने श्रद्धासुमन अर्पित कर सकेंगे।अंत्येष्टि संस्कार शुक्रवार, 24 अप्रैल 2026 को सायं 5:00 बजे वैकुंठ श्मशान भूमि, नवी पेठ, पुणे में संपन्न होगा।
जैन समाज के विभिन्न संघों, संस्थाओं, साधु-साध्वी वृंद एवं समाजजनों ने पूज्य ताई माँ के देवलोकगमन पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए इसे समाज की अपूरणीय क्षति बताया है। सभी श्रद्धालुओं से विनम्र निवेदन किया गया है कि वे अंतिम दर्शन में उपस्थित होकर अपनी भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करें। महाराष्ट्र जैन वार्ता और महाराष्ट्र न्यूज नेटवर्क परिवार की ओर से पद्मश्री प. पू. आचार्य श्री चंदनाजी म. सा. (पूज्य ताई माँ) को भावपूर्ण श्रद्धांजलि।

















