आवृत्ती , पुणे
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पैसे से ज्यादा महत्व प्रेम को दें : पं. राजरक्षित विजयजी

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पुणे : अगर आपको प्रेम और पैसे में किसी एक को महत्व देना हो, तो प्रेम को ज्यादा महत्व दें। इसी प्रकार के विचार पं. राजरक्षित विजयजी ने व्यक्त किए।

वे श्री आदिनाथ सोसायटी, जैन संघ पुणे में आयोजित कार्यक्रम में मार्गदर्शन कर रहे थे। पं. राजरक्षित विजयजी ने कहा कि अगर आपको प्रेम और पैसे में से किसी एक को चुनना हो, तो प्रेम को ज्यादा महत्व दें, पैसे को नहीं। शरीर में पानी की कमी हो जाने पर जैसे चक्कर आने लगते हैं, वैसे ही जीवन में प्रेम की कमी होने पर विघटन शुरू हो जाता है।

प्रेम एक ऐसा वशीकरण है जो शेर, बाघ, और नाग को भी वश में कर लेता है। प्रेम की कमी के कारण भाई-बहन, सास-बहू, और पिता-पुत्र के बीच झगड़े होने लगते हैं। चार पुरुषार्थों में काम (स्त्री) को अधम पुरुषार्थ कहा गया है, और अर्थ (धन) को अधमाधम पुरुषार्थ। काम की इच्छा थोड़ी देर के लिए शांत हो जाती है, लेकिन अर्थ की चाहत लगातार बढ़ती जाती है।

धन की लालसा जीव से कोई भी पाप करा देती है। यह भ्रष्टाचार, बेईमानी, मिलावट जैसे पाप करने से नहीं हिचकिचाती। हराम का पैसा खाया जा सकता है लेकिन पचाया नहीं जा सकता। जैसे खून चढ़ाने से पहले ब्लड ग्रुप की जांच की जाती है, वैसे ही पैसे लेने से पहले यह जांचना जरूरी है कि वह पैसा हराम का है या हक का।

अनैतिक धन दस साल में पूरे परिवार को तहस-नहस कर सकता है। नीति का धन (ईमानदारी से कमाया धन) की खिचड़ी, अनैतिक धन की खीर से ज्यादा अच्छी और मीठी होती है। धन को दौलत कहा जाता है। धन जब आता है तो कमर पर लात मारता है, जिससे आदमी अहंकारी हो जाता है।

और जब जाता है तो पेट पर लात मारता है, जिससे आदमी अधमुआ हो जाता है। पाप से बचने के लिए सात्विक बनें। पापों से लड़ें और पाप से एलर्जी को साँपों के डर से भी ज्यादा समझें। पाप से डरना साँपों से ज्यादा होना चाहिए।

26 अक्टूबर को सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक टीनी-मिनी संस्कार कैंप की पूर्णाहुति के निमित्त एक टैलेंट शो आयोजित किया जाएगा। इसमें 3 से 6 वर्ष के बालक-बालिकाएं विभिन्न कार्यक्रम प्रस्तुत कर अपने संस्कारों को श्रीसंघ के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।