‘सब कुछ संभव है’ विषय पर प्रेरणादायी SHRUT TALK का आयोजन
‘कविरहस्य’ ग्रंथ का हुआ लोकार्पण
महाराष्ट्र जैन वार्ता
पुणे : श्रुतदीप रिसर्च फाउंडेशन द्वारा आयोजित SHRUT TALK (श्रुतवार्ता) श्रृंखला के दूसरे सत्र का सफल आयोजन शनिवार, 6 जून को किया गया। इस अवसर पर मोटिवेशनल स्पीकर एवं माइंडसेट कोच राहुल कपूर जैन ने ‘Everything is Possible (सब कुछ संभव है)’ विषय पर प्रेरणादायी व्याख्यान देकर उपस्थित श्रोताओं का मार्गदर्शन किया।
अपने संबोधन में राहुल कपूर जैन ने बताया कि जैन धर्म के मूल सिद्धांतों और संस्कारों को बाल्यावस्था से ही बच्चों के जीवन में उतारकर उन्हें सफल, संस्कारी और आदर्श नागरिक बनाया जा सकता है। उ
न्होंने कहा कि सम्यक ज्ञान, सम्यक दर्शन और सम्यक चरित्र केवल साधु-साध्वियों के लिए ही नहीं, बल्कि गृहस्थ श्रावकों के लिए भी जीवन में अपनाने योग्य सिद्धांत हैं।
उन्होंने विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से मनुष्य के विचारों, भावनाओं और व्यक्तित्व निर्माण की प्रक्रिया को समझाते हुए आत्मविकास तथा तीर्थंकरत्व की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उनका व्याख्यान ज्ञानवर्धक होने के साथ-साथ अत्यंत प्रेरणादायी रहा।
कार्यक्रम के दौरान श्रुतदीप रिसर्च फाउंडेशन द्वारा संपादित महत्वपूर्ण ग्रंथ ‘कविरहस्य’ का लोकार्पण भी किया गया। यह ग्रंथ काव्य रचना में विभिन्न धातुओं के प्रयोग को समझाने वाला एक उपयोगी मार्गदर्शक है।
इसमें विविध छंदों में रचित 80 रोचक सुभाषितों का संग्रह संकलित किया गया है। काव्यशास्त्र एवं व्याकरणशास्त्र के विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए यह ग्रंथ विशेष रूप से उपयोगी माना जा रहा है।
इस अवसर पर संस्थाध्यक्ष राजेंद्र बाठिया, कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. वर्धमान जैन, उपाध्यक्ष दीपक शाह, सचिव नरेंद्र छाजेड, कोषाध्यक्ष किशोर ओसवाल, मुख्य मार्गदर्शक डॉ. जितेंद्र शाह, प्रबंधन समिति सदस्य ललित गुंदेचा, रमेश गांधी तथा संचालिका आदिती शाह उपस्थित रहे।
इसके अतिरिक्त कविरहस्य ग्रंथ के समन्वयक कांतिलाल छाजेड, प्रकाश धारीवाल, प्रकाश धोका, किरीट शेठ सहित जैन समाज के अनेक गणमान्यजन, शोधकर्ता, शिक्षाविद् एवं समाजबंधु बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
कार्यक्रम की शुरुआत सचिव नरेंद्र छाजेड द्वारा अतिथियों के स्वागत से हुई। संस्थाध्यक्ष राजेंद्र बाठिया ने प्रास्ताविक प्रस्तुत किया। अमोघ प्रभुदेसाई ने कविरहस्य ग्रंथ का परिचय कराया, जबकि ललित गुंदेचा ने कार्यक्रम का कुशल संचालन किया। अंत में किशोर ओसवाल ने आभार प्रदर्शन किया। ज्ञान, संस्कार और आत्मविकास के संदेश से परिपूर्ण यह आयोजन उपस्थित सभी श्रोताओं के लिए प्रेरणादायी एवं स्मरणीय सिद्ध हुआ। कार्यक्रम ने जैन दर्शन, साहित्य और व्यक्तित्व विकास के समन्वय का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया।
