‘परिचय से परिणय’ तक का सफर हुआ आसान
जीवनसाथी बिना करियर अधूरा : बाळासाहेब धोका
महाराष्ट्र जैन वार्ता
पुणे : जैन समाज के युवक-युवतियों को योग्य जीवनसाथी उपलब्ध कराने, वैवाहिक संवाद को प्रोत्साहन देने तथा परिवारों के बीच आत्मीय संबंधों को मजबूत बनाने के उद्देश्य से आयोजित “सकल जैन परिचय से परिणय” वधू-वर परिचय मेला आनंद दरबार, दत्तनगर में उत्साहपूर्ण वातावरण और व्यापक सहभागिता के साथ संपन्न हुआ।
मेले में महाराष्ट्र के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में युवक-युवतियों, अभिभावकों एवं समाजबंधुओं ने भाग लिया। उपस्थित प्रतिभागियों को प्रत्यक्ष संवाद स्थापित करने, एक-दूसरे को जानने तथा विवाह हेतु उपयुक्त जीवनसाथी के चयन पर विचार-विमर्श करने का अवसर प्राप्त हुआ।
इस आयोजन ने अनेक परिवारों को आपसी परिचय और संपर्क का प्रभावी मंच प्रदान किया। कार्यक्रम के प्रमुख मार्गदर्शक युवराज शाह ने उपस्थित युवाओं को संबोधित करते हुए विवाह समारोहों में बढ़ती दिखावटी जीवनशैली, अनावश्यक खर्च और इवेंट मैनेजमेंट संस्कृति पर चिंता व्यक्त की।
उन्होंने कहा कि विवाह केवल एक भव्य आयोजन नहीं, बल्कि दो परिवारों के मिलन और सामाजिक संबंधों को सुदृढ़ करने वाला संस्कार है।
उन्होंने युवाओं से जीवनसाथी का चयन करते समय केवल कुंडली मिलान तक सीमित न रहकर वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने तथा आपसी समझ, विचारों की समानता और संस्कारों को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।
आनंद दरबार के अध्यक्ष बाळासाहेब धोका ने कहा कि करियर निर्माण के लिए अथक परिश्रम, दृढ़ संकल्प और समर्पण आवश्यक है, किंतु उस सफलता का वास्तविक आनंद जीवनसाथी के सहयोग से ही पूर्ण होता है।
उन्होंने कहा कि उचित समय पर योग्य जीवनसाथी का चयन कर प्रेम, विश्वास और समझदारी के आधार पर गृहस्थ जीवन की नींव रखना ही सफल, सुखी और संतुलित जीवन का मार्ग है।
कार्यक्रम के दौरान सुरेखा बेताळा, पूजा गुगळे जैन एवं कविता श्रीश्रीमाळ ने “परिचय से परिणय : सहजीवन का मंगलमय सफर” विषय पर एक अभिनव प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया।
इस सत्र के माध्यम से उन्होंने विवाह एवं वैवाहिक जीवन के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला तथा बताया कि विवाह केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि दो परिवारों के भावनात्मक मिलन का पवित्र बंधन है।
इस अवसर पर सहभागी युवक-युवतियों को लगभग बीस सदस्यों के समूहों में विभाजित कर सहजीवन से संबंधित विभिन्न प्रश्नावली प्रदान की गई।
समूह चर्चा के माध्यम से प्रतिभागियों ने प्रश्नों के उत्तर खोजे और सफल, सुखी तथा समंजस वैवाहिक जीवन के लिए आवश्यक मूल्यों पर अपने विचार व्यक्त किए।
इस अभिनव उपक्रम ने विवाह-पूर्व परामर्श, पारिवारिक जिम्मेदारियों, संवाद और पारस्परिक समझ के महत्व को प्रभावी रूप से रेखांकित किया।
कार्यक्रम के मंच पर आयोजन के आधारस्तंभ रमणलाल लुंकड, समारोह गौरव अचल जैन तथा विलास राठोड विशेष रूप से उपस्थित थे।
मेले के सफल आयोजन हेतु पृथ्वीराज धोका, डॉ. अशोककुमार पगारिया, अशोक कटारिया, सुनील देसरडा, सुरेखा बेताळा, पूजा गुगळे जैन, कविता श्रीश्रीमाळ एवं दिलीप संचेती सहित संपूर्ण आयोजन समिति ने विशेष परिश्रम किए।
उपस्थित समाजबंधुओं ने इस समाजोपयोगी पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन विवाह प्रक्रिया को अधिक सहज और सार्थक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
समाज में एकता, संवाद और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण की दिशा में यह वधू-वर परिचय मेला प्रेरणादायी सिद्ध हुआ। आयोजकों ने भविष्य में भी ऐसे समाजहितैषी कार्यक्रमों के आयोजन का संकल्प व्यक्त किया।
