प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री के साथ दस्तावेजों की जांच जरूरी
सावधानी से टल सकता है नुकसान : रियल एस्टेट विशेषज्ञ व संतोष ग्रुप के डायरेक्टर संतोष जैन
महाराष्ट्र न्यूज नेटवर्क
पुणे : भविष्य के लिए एक अच्छे निवेश के रूप में कई लोग जमीन, प्लॉट या फ्लैट खरीदते हैं और उसकी रजिस्ट्री करवाते हैं। हालांकि, सिर्फ रजिस्ट्री करवाने से ही आप उस संपत्ति के वास्तविक मालिक नहीं बन जाते। रजिस्ट्री केवल खरीद-बिक्री के लेन-देन का एक प्रमाण होती है। इसलिए, संपत्ति का पूर्ण स्वामित्व प्राप्त करने के लिए अन्य आवश्यक दस्तावेजों की वैधता की जांच भी जरूर कर लेनी चाहिए। यह सलाह प्रसिद्ध रियल एस्टेट विशेषज्ञ और संतोष ग्रुप के डायरेक्टर संतोष जैन ने दी है।
बता दें कि कई लोग प्रॉपर्टी खरीदते ही उसकी रजिस्ट्री करवा लेते हैं और इस भ्रम में रहते हैं कि अब वे उस संपत्ति के पूर्ण मालिक बन गए हैं।
लेकिन न्यायालय ने यह स्पष्ट कर दिया है कि केवल रजिस्ट्री के दस्तावेजों से संपत्ति का वास्तविक मालिकाना हक सिद्ध नहीं होता। रजिस्ट्री केवल इतना दर्शाती है कि आपने पैसे देकर जमीन या मकान खरीदा है।
परंतु, इससे यह साबित नहीं होता कि संपत्ति बेचने वाले व्यक्ति के पास उस संपत्ति का वैध और स्पष्ट मालिकाना हक था या नहीं।
संतोष जैन ने कहा कि आप जमीन उसके आधिकारिक या मूल मालिक से खरीद रहे हैं या नहीं, यही सबसे महत्वपूर्ण बात है।
इसे ध्यान में रखकर कदम उठाने से संपत्ति में आपका निवेश सुरक्षित रहता है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, संपत्ति के संबंध में भविष्य में होने वाले किसी भी विवाद से बचने के लिए रजिस्ट्री (खरीदखत) से पहले और बाद में कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेजों और प्रविष्टियों की जांच करना अत्यंत आवश्यक है।
संतोष जैन बताते हैं कि कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले उसके पुराने दस्तावेजों की पूरी श्रृंखला की जांच करना बेहद आवश्यक है। इससे यह स्पष्ट होता है कि पिछले लगभग 30 वर्षों में यह संपत्ति किस-किस के नाम पर रही है और हर बार इसका हस्तांतरण किस दस्तावेज के आधार पर हुआ है।
यदि इस श्रृंखला की कोई कड़ी गायब हो या दस्तावेज संदिग्ध लगें, तो भविष्य में विवाद पैदा होने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे विवाद न केवल मानसिक तनाव देते हैं, बल्कि इनसे हमारा निवेश भी खतरे में पड़ सकता है।
इनकम्ब्रेंस सर्टिफिकेट से ग्राहकों को संपत्ति से संबंधित सभी लेन-देन, बैंक लोन, गिरवी (मॉर्गेज) या अन्य वित्तीय बोझ की जानकारी मिलती है।
यह जानकारी ग्राहकों के पास होना बहुत जरूरी है, ताकि जमीन खरीदने के बाद अगर उस पर किसी तरह का कर्ज या मॉर्गेज सामने आता है, तो उन्हें परेशानी न उठानी पड़े।
संबंधित जमीन की पुरानी वित्तीय देनदारियों या कानूनी स्थिति को जानने में यह प्रमाणपत्र मदद करता है। इसके बावजूद, इनकम्ब्रेंस सर्टिफिकेट (भारमुक्तता प्रमाणपत्र) को सभी प्रकार के विवादों से पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं माना जा सकता।
इसलिए संतोष जैन बताते हैं कि इस प्रमाणपत्र के साथ-साथ अन्य सभी दस्तावेजों और सरकारी रिकॉर्ड की भी जांच-पड़ताल करना आवश्यक है।
प्रॉपर्टी खरीदते वक्त तीन बातें हमेशा ध्यान में रखें :- जमीन, प्लॉट या फ्लैट खरीदते समय तीन बातों को हमेशा ध्यान में रखें। पहली, जिस जमीन को हम खरीदने जा रहे हैं, उसके मूल मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर लें और उन्हीं के आधार पर कानूनी प्रक्रिया पूरी करें। इससे धोखाधड़ी से बचने में मदद मिलती है। दूसरी, इनकम्ब्रेंस सर्टिफिकेट की जांच करें। इससे लोन, मॉर्गेज या अन्य वित्तीय देनदारियों की जानकारी मिलती है। तीसरी, जमीन या मकान की खरीद-बिक्री (रजिस्ट्री) पूरी होते ही राजस्व विभाग और संबंधित नगरपालिका या महानगरपालिका के रिकॉर्ड में तुरंत अपना नाम दर्ज करा लें। सरकारी दस्तावेजों में नाम दर्ज होने पर ही आपके नाम से टैक्स की रसीद मिलती है और आवश्यकता पड़ने पर उसी के आधार पर बैंक से लोन (ऋण) मिल सकता है। – संतोष जैन, डायरेक्टर, संतोष ग्रुप
बेवजह विवादों से बचना चाहिए – यदि आप किसी फ्लैट या गेटेड सोसाइटी में घर खरीदने जा रहे हैं, तो सोसाइटी से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) लिए बिना कोई भी भुगतान न करें। सोसाइटी से यह भी लिखित रूप में सुनिश्चित कर लें कि उस घर का कोई मेंटेनेंस बिल, पानी या बिजली का बिल अथवा अन्य कोई शुल्क बकाया नहीं है। अन्यथा, यह पुराना बकाया आपको ही चुकाना पड़ सकता है। इससे एक ओर आपको बेवजह विवादों का सामना करना पड़ेगा, वहीं दूसरी ओर अतिरिक्त खर्च भी उठाना पड़ सकता है।
