आवृत्ती पुणे

ज्ञान के लिए जो चलता है वही है विद्यार्थी : प. पू. प्रवीणऋषिजी म. सा.

महाराष्ट्र जैन वार्ता पुणे : मनुष्य वही होता है, जो अपने इच्छित लक्ष्य तक पहुँचने के लिए चलता है। साधक साधना के लिए चलता है, कोई भक्त भक्ति के लिए चलता है, और विद्यार्थी वही होता है, जो ज्ञान की तलाश में चलता है। इसलिए, जब भी मैं कोई क्रिया करने जा रहा हूँ, तो … Read more

शरीर को बनाएं धर्म का मंदिर : प. पू. प्रवीणऋषिजी म. सा.

महाराष्ट्र जैन वार्ता पुणे : आप अपने शरीर को भोग का केंद्र बना सकते हैं या रोग का भी केंद्र बना सकते हैं। हमें अपनी शक्ति को शरीर को धर्म का केंद्र बनाने में लगाना चाहिए। एक बार जब शरीर धर्म का मंदिर बन जाता है, तो मन अपने-आप वहीं स्थिर हो जाता है, इधर-उधर … Read more