कर्म और धर्म का अंतर समझें : प. पू. प्रवीणऋषिजी म. सा.
महाराष्ट्र जैन वार्ता पुणे : सबसे पहले कर्म और धर्म के बीच का अंतर समझना आवश्यक है। व्रत, उपवास, दान आदि पुण्य कर्म का एक मार्ग है, लेकिन धर्म उससे भी आगे है। पुण्य केवल धर्म तक ले जाने वाली राह है। धर्म का मूल तत्त्व अलग ही है और उसे पहचानना चाहिए, ऐसा प्रतिपादन … Read more