आवृत्ती , पुणे
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प्राकृत महाकाव्य “वीरब्भुदयं” की कृति दिनेश मुनि को भेट

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उदयपुर : 24 वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी के जीवन वृत पर डॉ. उदय जैन द्वारा स्व:रचित “वीरब्भुदयं” प्राकृत महाकाव्य की प्रथम कृति श्रमणसंघीय सलाहकार प.पु. दिनेशमुनिजी को भेट की।

भगवान महावीर के 2550 वें निर्वाण कल्याणक वर्ष के उपलक्ष में डॉ. जैन ने “वीरब्भुदयं” महाकाव्य में भगवान महावीर के जन्म, दीक्षा, साधना, उपसर्ग व निर्वाण प्राप्ति के साथ-साथ आदिवासी संस्कृति तथा पर्यावरण व तात्कालिक गणराज्य वैशाली के कुंडग्राम की सांस्कृतिक परम्परा को भी सुंदर रूप से प्राकृत में प्रस्तुत किया है।

चार सौ आठ पृष्ठों के इस महाकाव्य में 26 अध्यायों सहित 100 से अधिक छंदो का उपयोग किया गया है। उल्लेखनीय है कि, वर्ष 2010 में प्राकृत साहित्य के लिये राष्ट्रपति पुरूस्कार से सम्मानित डॉ. जैन का यह “वीरब्भुदयं” 23 वां महाकाव्य है।

उदयपुर के मोहनलाल सुखाडिया विश्वविद्यालय के जैन विद्या एवं प्राकृत विभाग एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. जैन के निर्देशन में 30 छात्र-छात्राओं ने पीएचडी उपाधि प्राप्त की है।