पुणे में भव्य विदाई समारोह; हजारों युवाओं को दी व्यसनमुक्ति और धर्म की प्रेरणा
महाराष्ट्र जैन वार्ता
पुणे : पुणे नगर में तीन लगातार चातुर्मास पूर्ण कर हजारों युवाओं को व्यसनमुक्ति, प्रभुभक्ति और संस्कारों की दिशा देने वाले आचार्य राजरक्षितसूरिजी महाराज एवं युवा प्रवचनकार पंन्यास नयरक्षितविजयजी महाराज का भव्य विदाई समारोह श्री शत्रुंजय भक्तामर तीर्थ, कोंढवा में आयोजित किया गया। इस अवसर पर पुणे, भोर, उरलीकांचन, हडपसर सहित विभिन्न क्षेत्रों से सैकड़ों श्रद्धालु एवं गुरु भक्त उपस्थित रहे।
पुणे के श्री गोडीजी, आदिनाथ सोसायटी तथा सैलिसबरी पार्क जैन संघ में लगातार तीन वर्षों तक (हैट्रिक) चातुर्मास कर आचार्यश्री ने एल.टी.एस. शिविर, रात्रि प्रवचन, वन-डे शिविर, प्रभु मिलन और दैनिक प्रवचनों के माध्यम से युवाओं में सकारात्मक परिवर्तन लाया।
अनेक युवाओं ने अपने जीवन के “टर्निंग पॉइंट” की प्रेरणादायक घटनाएं साझा करते हुए बताया कि कैसे उनके जीवन में आध्यात्मिक बदलाव आया। युवा प्रवचनकार पंन्यास नयरक्षितविजयजी महाराज ने अपने संबोधन में बताया कि वर्ष 2015 में उन्हें पहली बार पुणे आने का अवसर मिला और गोडीजी चिंतामणि पार्श्वनाथ प्रभु से जुड़ने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
इसके बाद वर्ष 2023, 2024 और 2025 में लगातार तीन चातुर्मास सम्पन्न हुए। उन्होंने कहा कि पहले यह धारणा थी कि पुणे में भोग-विलास और नास्तिकता अधिक है, लेकिन इन चातुर्मासों के दौरान सैकड़ों युवाओं ने अपने जीवन में परिवर्तन लाकर इस धारणा को गलत सिद्ध कर दिया।
उन्होंने इस सफलता का श्रेय पूज्य गच्छाधिपति आचार्य राजेन्द्रसूरिजी महाराज की कृपा और पूज्य गुरुमां चन्द्रशेखरविजयजी महाराज के आशीर्वाद को दिया। साथ ही कहा कि पुणे के लोगों के साथ विशेष आत्मीय संबंध (ऋणानुबंध) के कारण ही तीन चातुर्मास का अवसर प्राप्त हुआ।
आचार्य राजरक्षितसूरिजी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि जैसे वाहन पेट्रोल से चलता है, वैसे ही संसार पुण्य से चलता है। उन्होंने शुद्ध पुण्य अर्जित करने के लिए तीन बातों का नियमित पालन करने का संदेश दिया परमात्मा की पूजा, परोपकार के कार्य और प्रवचन का श्रवण।
उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान समय में विश्व की परिस्थितियां दिन-प्रतिदिन गंभीर होती जा रही हैं। ऐसे में मंदी, आर्थिक संकट और महंगाई से बचाव के लिए शुद्ध पुण्य अत्यंत आवश्यक है। परमात्मा की अष्टप्रकारी पूजा शुद्ध पुण्य का सृजन करती है और जो व्यक्ति प्रभु का भजन करता है, वह कभी टूटता नहीं है।
कार्यक्रम के अंत में आचार्यश्री ने दक्षिण भारत की ओर विहार यात्रा की घोषणा की। यह यात्रा 6 अप्रैल से प्रारंभ होकर कोल्हापुर की ओर जाएगी तथा 8 मई को कोल्हापुर-पन्हाला में मुमुक्षु मनोजकुमार की दीक्षा आयोजित की जाएगी।
















