कवठे की पुण्य धरा पर प. पू. आचार्य विश्वकल्याण सूरीश्वरजी म. सा. का चातुर्मास
श्री पद्ममणि पंचतीर्थी परिसर में 24 जुलाई को होगा पूज्य गुरुदेव का भव्य मंगल प्रवेश
महाराष्ट्र जैन वार्ता
कवठे (येमाई) : पुणे जिले की शिरूर तहसील स्थित कवठे (येमाई) गांव को इस वर्ष चातुर्मास का दुर्लभ सौभाग्य प्राप्त हुआ है। श्री पद्ममणि पंचतीर्थी के उद्धारक प. पू. आचार्य श्री विश्वकल्याण सूरीश्वरजी म. सा. एवं प. पू. मुनिराज श्री विश्वमैत्री विजयजी म. सा. चातुर्मास हेतु यहां पधार रहे हैं। पूज्य गुरुदेव का भव्य मंगल प्रवेश शुक्रवार, 24 जुलाई 2026 को प्रातः 9 बजे होगा।
पुणे जिले के पाबल गांव की पुण्य धरा पर स्थित श्री पद्ममणि तीर्थ श्रद्धा और आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है। देशभर से श्रद्धालु यहां दर्शन-पूजन के लिए आते हैं।
इस तीर्थ के साथ चारों दिशाओं में स्थित प्राचीन जिनालयों का भी जीर्णोद्धार किया गया है। इसके कारण यह क्षेत्र अब ‘श्री पद्ममणि पंचतीर्थी’ के नाम से प्रसिद्ध हो रहा है।
पाबल तीर्थ की पूर्व दिशा में कवठे, उत्तर में लोनी, पश्चिम में वाफगांव और दक्षिण में केंदूर के प्राचीन जिनालय स्थित हैं। श्रद्धालु इन पंचतीर्थों के दर्शन एवं पूजन कर आध्यात्मिक आनंद का अनुभव कर रहे हैं।
इस वर्ष पंचतीर्थी के अंतर्गत आने वाले कवठे (येमाई) गांव को चातुर्मास का सौभाग्य मिला है। मात्र सात जैन परिवारों वाले इस छोटे से क्षेत्र में पंचतीर्थी के उद्धारक प. पू. आचार्य श्री विश्वकल्याण सूरीश्वरजी म. सा. एवं प. पू. मुनिराज श्री विश्वमैत्री विजयजी म. सा. चातुर्मास हेतु पधार रहे हैं।
इस ऐतिहासिक अवसर को लेकर स्थानीय जैन समाज में उत्साह और भक्तिमय वातावरण है। समाजजनों ने इसे अपना परम सौभाग्य बताते हुए कहा कि पुणे जिले के उद्धारक एवं परम उपकारी आचार्य भगवंत का चातुर्मास प्राप्त होने से पूरा क्षेत्र गौरवान्वित हुआ है।
कवठे गांव अपने अत्यंत प्राचीन जिनालय के लिए जाना जाता है। यहां देवाधिदेव श्री नमिनाथ भगवान मूलनायक के रूप में विराजमान हैं।
दोनों ओर की देवकुलिकाओं में प्राचीन श्री पार्श्वनाथ भगवान एवं श्री चंद्रप्रभु स्वामी भगवान विराजमान हैं। विशाल परिसर में निर्मित शिखरबद्ध जिनालय अपनी भव्यता और कलात्मकता के कारण श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।
जिनालय के समीप प्राचीन मणिभद्रजी की तीन प्रतिमाओं से युक्त मणिभद्रजी देवकुलिका स्थित है। इसके साथ ही एक गोखले में प. पू. भुवनभानु सूरीश्वरजी म. सा. की मनोहर प्रतिमा विराजमान है।
मंदिर का बाहरी मंडोवर संगमरमर पर उकेरी गई विशिष्ट कलाकृतियों से अलंकृत है। यह प्राचीन तीर्थ अब नवनिर्मित स्वरूप में साकार हो रहा है।
पाबल से लोनी गांव की दूरी करीब आठ किलोमीटर है, जबकि लोनी से कवठे गांव लगभग 10 किलोमीटर दूर है। आवागमन के लिए मार्ग सुव्यवस्थित है।
पाबल होकर कवठे जाने वाले श्रद्धालुओं को दो प्राचीन एवं भव्य जिनालयों के दर्शन का लाभ भी प्राप्त होगा। इसके अतिरिक्त अहमदनगर-पुणे राजमार्ग से शिरूर, घोडनदी और पाबल रोड होते हुए मलठण गांव के रास्ते भी कवठे पहुंचा जा सकता है।
चातुर्मास मंगल प्रवेश 24 जुलाई को – प. पू. आचार्य श्री विश्वकल्याण सूरीश्वरजी म. सा.एवं प. पू. मुनिराज श्री विश्वमैत्री विजयजी म. सा. का भव्य चातुर्मास मंगल प्रवेश आषाढ़ शुक्ल दशमी, शुक्रवार, 24 जुलाई 2026 को प्रातः 9 बजे होगा। आयोजकों ने गुरु भक्ति के इस पावन अवसर पर सभी श्रद्धालुओं से उपस्थित होकर दर्शन, वंदन एवं धर्मलाभ लेने का अनुरोध किया है।