आचार्य श्री यशोविजयसूरीजी महाराज के सान्निध्य में पुणे का चातुर्मास बना आस्था का केंद्र
चातुर्मास के प्रथम दिन 800 श्रद्धालुओं ने लिया उपवास का पच्चक्खाण, महिलाओं एवं बच्चों के लिए विशेष संस्कार शिविर
महाराष्ट्र जैन वार्ता
पुणे : पुणे के ऐतिहासिक श्री गोडीजी पार्श्वनाथ जैन मंदिर में भक्तियोगाचार्य आ.भ. श्री यशोविजयसूरिजी महाराज, शाखसंशोधक आ.भ. मुनिचंद्रसूरिजी महाराज, आ.भ. राजपुण्यसूरिजी महाराज, आ.भ. कल्पज्ञविजयसूरिजी महाराज आदि विशाल साधु समुदाय के पावन सान्निध्य में चल रहा चातुर्मास धर्म, तप और संस्कार का केंद्र बन गया है। 28 जून को हुए भव्य चातुर्मास प्रवेश के बाद से प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु धर्मलाभ ले रहे हैं।
आचार्य भगवंतों के प्रेरणादायी प्रवचनों के माध्यम से धर्म को व्यवहारिक जीवन से जोड़ने का संदेश दिया जा रहा है। प्रतिदिन सुबह 8:15 से 9:15 बजे तक आयोजित वाचना एवं प्रवचन में आत्मकल्याण, संस्कार, संयम और आध्यात्मिक जीवन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर मार्गदर्शन दिया जा रहा है। पुणे के साथ-साथ मुंबई, नाशिक, अहमदनगर, सांगली, कोल्हापुर सहित महाराष्ट्र के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु धर्मलाभ लेने पहुंच रहे हैं।
इस चातुर्मास में समाज के प्रत्येक वर्ग को धर्म एवं संस्कारों से जोड़ने के विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। महिलाओं के लिए धार्मिक एवं प्रेरणादायी शिविर तथा बच्चों के लिए संस्कार शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इन शिविरों में धार्मिक शिक्षा के साथ संस्कार, अनुशासन और जैन संस्कृति की प्रेरणा दी जा रही है।
आयोजन के सफल संचालन में श्री गोडीजी पार्श्वनाथ जैन टेम्पल ट्रस्ट, पुणे की महत्वपूर्ण भूमिका है। ट्रस्ट के चेयरमैन चिरागजी दोशी, भरतजी रसीकलालजी शाह, गिरेंद्रजी शाह एवं भूपेंद्रजी शाह तथा ट्रस्टी अशोकजी शाह एवं सुधीरजी शाह सहित समस्त ट्रस्ट मंडल श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
श्रद्धालुओं की बढ़ती सहभागिता, तप आराधना, नियमित प्रवचन और संस्कारमूलक कार्यक्रमों के कारण श्री गोडीजी पार्श्वनाथ जैन मंदिर का यह चातुर्मास महाराष्ट्र के जैन समाज में विशेष चर्चा का विषय बन गया है। यह चातुर्मास धर्म, संयम, सेवा और आध्यात्मिक जागरण का प्रेरणादायी अभियान बन रहा है।
श्री गोडीजी पार्श्वनाथ जैन मंदिर में आयोजित चातुर्मास के मुख्य लाभार्थी श्री प्रकाशजी रसीकलालजी धारीवाल परिवार द्वारा धर्म आराधना एवं आयोजन के लिए विशेष सहयोग प्रदान किया जा रहा है। उनके सहयोग से चातुर्मास के विविध धार्मिक कार्यक्रमों, साधु भगवंतों की सेवा एवं श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं का सफल संचालन किया जा रहा है।
श्री गोडीजी पार्श्वनाथ जैन मंदिर में चल रहे चातुर्मास के प्रथम दिन ही 800 श्रद्धालुओं ने उपवास (मासक्षमण) का पच्चक्खाण ग्रहण कर तप आराधना का संकल्प लिया। श्रद्धालुओं की बड़ी सहभागिता ने चातुर्मास के आध्यात्मिक वातावरण को और अधिक प्रभावशाली बना दिया। इसके साथ ही 50 दिनों में 126 सामायिक की विशेष साधना भी श्रद्धापूर्वक जारी है।
