आनंदधाम में गूंजा ‘जय गुरु आनंद’ का जयघोष
3,600 से अधिक तपस्वियों ने गुरुदेव के चरणों में अट्ठाई तपस्या का लिया संकल्प
महाराष्ट्र जैन वार्ता
अहिल्यानगर : आनंदधाम परिसर में चल रहे उपाध्याय श्री प. पू. प्रविणऋषीजी म. सा. के समर्पण चातुर्मास में गुरुवार को राष्ट्रसंत आचार्य आनंदऋषिजी म. सा. की 127वीं जन्मजयंती भक्तिमय वातावरण में मनाई गई। गुरुभक्ति के इस पावन अवसर पर नगर सहित देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। जन्मजयंती के उपलक्ष्य में 3,600 से अधिक तपस्वियों ने अट्ठाई उपवास का प्रत्याख्यान किया।
आचार्यश्री का जन्मोत्सव महाराष्ट्र प्रवर्तक प. पू. कुंदनऋषीजी म. सा., प. पू. मुनिश्री हितप्रेम विजयजी म. सा., प. पू. आलोकऋषीजी म. सा., प. पू. तीर्थेशऋषीजी म. सा., महासतीजी प. पू. सत्यप्रभाजी म. सा. एवं महासतीजी प. पू. अमितज्योतीजी म. सा. सहित साधु-साध्वीजी भगवंतों के सान्निध्य में संपन्न हुआ।
इस अवसर पर चातुर्मास के मुख्य लाभार्थी, अहिल्यानगर के सुपुत्र, मुंबई के प्रसिद्ध उद्योगपति एवं तिरुपति बालाजी देवस्थान के ट्रस्टी सौरभ बोरा, धार्मिक परीक्षा बोर्ड के अध्यक्ष नेमीचंद चोपड़ा, जैन कॉन्फ्रेंस के राष्ट्रीय चेयरमैन रमेश भंडारी, महामंत्री अमितराय जैन, जीतो के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय भंडारी, गुरु आनंद फाउंडेशन के चेयरमैन सतीश सुराणा, चेन्नई स्थित अर्हम् विज्जा के संस्थापक कांताबाई चोरडिया, गौतम कांकरिया, राखी सौरभ बोरा, प्रमिलाबाई हेमराजजी बोरा, पराग बोरा एवं बोरा परिवार सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।
समर्पण चातुर्मास कमिटी के अध्यक्ष अशोक (बाबूशेठ) बोरा, महामंत्री आदेश चंगेडिया, कार्याध्यक्ष राजेश भंडारी, कोषाध्यक्ष विलास कटारिया, उपाध्यक्ष अनिल पोखरणा, राजकुमार बोरा, विजय गुगले, सुरेश कांकरिया, सचिन देसरडा, मनसुख गुंदेचा, सहसचिव अभय गांधी, अभिजीत गांधी सहित कमिटी के सदस्य एवं सौरभ बोरा मित्र परिवार के सदस्य उपस्थित थे।
नगर, महाराष्ट्र सहित बेंगलुरु, चेन्नई, राजस्थान, मध्यप्रदेश, कर्नाटक एवं देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु आचार्यश्री की कर्मभूमि में पहुंचे। आचार्यश्री की समाधि स्थली पर सुबह से ही दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही।
गुरुदेव की जन्मजयंती पर 3,600 से अधिक तपस्वियों की अट्ठाई तपस्या : गुरुदेव की कर्मभूमि आनंदधाम में आचार्य आनंदऋषिजी महाराज की 127वीं जन्मजयंती पर तपस्या का अनूठा दृश्य देखने को मिला। देशभर से पहुंचे 3,600 से अधिक तपस्वियों ने अट्ठाई उपवास का प्रत्याख्यान कर गुरुदेव के चरणों में अपनी श्रद्धा समर्पित की। सामूहिक तपस्या से आनंदधाम परिसर भक्तिमय वातावरण और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो गया। ‘जय गुरु आनंद’ के जयघोष से पूरा परिसर गूंज उठा।

