आनंद दरबार में आचार्य भगवंत प.पू. श्री आनंदऋषिजी म.सा. जयंती का भव्य उत्सव
गुरुदेव के 14 शुभचिन्हधारी चरणकमलों से आनंद दरबार बना श्रद्धा का स्थान
महाराष्ट्र जैन वार्ता
पुणे : गुरु के प्रति श्रद्धा, सेवा और सामाजिक समर्पण की भावना से आनंद दरबार, दत्तनगर-कात्रज में राष्ट्रसंत आचार्य भगवंत प.पू. श्री आनंदऋषिजी म.सा. की 126वीं जन्मजयंती बड़े उत्साह और भक्तिभाव के साथ मनाई गई। गुरुदेव के 14 शुभचिन्हधारी चरणकमलों के दर्शन से आनंद दरबार श्रद्धा का केंद्र बन गया।
सुबह से ही आनंद दरबार में श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई थी और पूरे परिसर में भक्ति एवं आध्यात्मिकता का वातावरण देखने को मिला।
चरणकमल पादुकाओं के दर्शन, भव्य पालखी शोभायात्रा जयंती के अवसर पर 14 शुभचिन्हधारी चरणकमल पादुकाओं के दर्शन का लाभ श्रद्धालुओं को मिला। संदीप बेलदरे के निवासस्थान से आंबेगांव रोड होते हुए आनंद दरबार तक भव्य पालखी शोभायात्रा निकाली गई। श्रद्धालुओं की सहभागिता से शोभायात्रा भक्तिमय बन गई। आनंद दरबार पहुंचने के बाद कार्यक्रम का समापन हुआ और श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसादी की व्यवस्था की गई।
दोपहर में आयोजित राज्यस्तरीय पुरस्कार समारोह में समाज के लिए उल्लेखनीय कार्य करने वाले व्यक्तित्वों का सम्मान किया गया। दक्षिण पुणे वारकरी संप्रदाय में उल्लेखनीय योगदान के लिए ह.भ.प. श्री गुरुवर्य माऊली जनार्दनजी जंगले को ‘दक्षिण वारकरी पुण्यभूषण पुरस्कार’, श्री चक्रधर विद्यालय के अध्यक्ष प्रा. डॉ. महेंद्र कोंढरे को ‘सरस्वती भूषण पुरस्कार’, जबकि प्रा. बाजीराव गायकवाड को ‘गुरुआनंद कार्यक्षम पत्रकार पुरस्कार’ प्रदान किया गया।
पूर्व विधायक उल्हासदादा पवार के शुभहस्ते पुरस्कार प्रदान किए गए। समारोह में प्रा. डॉ. व्ही. एस. अंकलकोटे, नगरसेवक संदीप बेलदरे, व्यंकोजी खोपडे, नगरसेविका सीमा बेलदरे, स्मिता कोंढरे, प्रतिभा चोरगे, ह.भ.प. गणेश महाराज भगत, ह.भ.प. भगवानराव मांगडे, भगवान खेडेकर सहित विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य उपस्थित रहे।
इस अवसर पर पूर्व विधायक उल्हासदादा पवार ने कहा कि उन्हें आचार्य आनंदऋषिजी महाराज के कई बार दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उनके साथ बिताए क्षणों में आचार्यश्री की प्रभावशाली वाणी और व्यक्तित्व से वे अत्यंत प्रभावित हुए। आचार्यश्री ने समाज को परोपकार, मानवसेवा और सामाजिक सेवा का संदेश दिया। उनका यह प्रेरणादायी संदेश आज भी समाज के लिए मार्गदर्शक है और आने वाली पीढ़ियों को मानवसेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा।
महाप्रसादी के भाग्यशाली मानकरी श्रीमती लीलादेवी बन्सीलालजी ओस्तवाल एवं अनिल, मनोज ओस्तवाल रहे। आनंद दरबार के अध्यक्ष बाळासाहेब धोका ने सभी मान्यवरों, पुरस्कारार्थियों, श्रद्धालुओं और आयोजन में सहयोग देने वाले सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम की सफलता के लिए दत्ता कामठे, राजुशेठ वर्मा, माऊली लिपाणे, दिलीप संचेती, संतोष भंडारी, संतोष दुगड़, सुभाष पिरगळ, प्रकाश भटेवरा, सौरभ धोका सहित सभी सदस्यों ने विशेष मेहनत की।
