लोणीकंद में पिरामिड ध्यान केंद्र का पुनः शुभारंभ
एक दिवसीय ध्यान शिविर में बड़ी संख्या में साधकों ने लिया हिस्सा
महाराष्ट्र जैन वार्ता
पुणे : लोणीकंद स्थित क्षेत्रपाल प्रतिष्ठान में भव्य पिरामिड ध्यान केंद्र का पुनः शुभारंभ एक दिवसीय ध्यान शिविर के साथ किया गया। यह आयोजन प. पू. आचार्य भगवंत शिवमुनिजी म. सा. के पावन आशीर्वाद तथा वाणीभूषण महासती प. पू. प्रीतिसुधाजी म. सा. के आशीर्वाद से, प. पू. अरुणप्रभाजी म. सा., प. पू. मंगलप्रभाजी म. सा. एवं समस्त साध्वीगण के सान्निध्य में संपन्न हुआ।
लोणीकंद में स्थित यह पिरामिड ध्यान केंद्र पुणे एवं महाराष्ट्र के साधकों के लिए ध्यान और आध्यात्मिक साधना के केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
केंद्र को पुनः प्रारंभ करने की प्रेरणा प. पू. महासतीजी से प्राप्त हुई। उनके मार्गदर्शन से प्रफुल्ल कोठारी एवं उनकी धर्मपत्नी दीपाली कोठारी ने केंद्र को पुनः प्रारंभ करने का संकल्प लिया। उनके प्रयास एवं सेवाभाव से यहां दोबारा ध्यान साधना की शुरुआत हुई।
शुक्रवार को आयोजित ध्यान शिविर में बड़ी संख्या में साधकों एवं श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। शांत वातावरण में साधकों ने ध्यान एवं आत्मचिंतन किया।
शिविर के दौरान साधकों को मानसिक शांति एवं सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव कराने पर विशेष जोर दिया गया। इस अवसर पर येरवडा श्री संघ के चंद्रकांत लोढा सहित क्षेत्रपाल प्रतिष्ठान के श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे।
पिरामिड ध्यान केंद्र के मूल निर्माण में जुगराज पालरेशा का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनके करकमलों द्वारा केंद्र के नवनिर्मित एवं नवीनीकृत स्वरूप का पुनः उद्घाटन किया गया। इसके साथ ही ध्यान शिविर का शुभारंभ हुआ।
आयोजकों के अनुसार, आने वाले समय में इस केंद्र पर नियमित रूप से ध्यान एवं आध्यात्मिक साधना से जुड़े उपक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे पुणे एवं महाराष्ट्र के अधिक से अधिक साधक इससे जुड़ सकें।
केंद्र को ध्यान, आत्मचिंतन एवं सकारात्मक ऊर्जा के लिए उपयोगी साधना स्थल के रूप में विकसित करने का उद्देश्य रखा गया है।
