वर्धमान इन्स्टिट्यूट के दीक्षांत समारोह में 41 विद्यार्थियों को मिली डिग्री
मयुरी चोरडिया और बरखा बांठिया को गोल्ड मेडल
महाराष्ट्र जैन वार्ता
पुणे : वर्धमान एज्युकेशन एण्ड रिसर्च इन्स्टिट्यूट, पुणे का पंचम दीक्षांत समारोह शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 को हर्षोल्लास, गरिमा एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। प्राकृत एवं जैन स्टडीज के क्षेत्र में शिक्षा, शोध एवं प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण-संवर्धन हेतु समर्पित यह संस्था निरंतर प्रगति करते हुए देशभर में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर रही है।
संस्था की स्थापना वर्ष 2015 में हुई थी। तब से प्राकृत एवं जैन अध्ययन के क्षेत्र में शैक्षणिक एवं शोध संबंधी गतिविधियाँ निरंतर संचालित की जा रही हैं।
संस्था का आधुनिक ग्रंथालय 30,000 से अधिक ग्रंथों से समृद्ध है, जो विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं जिज्ञासुओं के लिए ज्ञान का एक महत्वपूर्ण केंद्र है।
संस्था द्वारा MIT-ADT विश्वविद्यालय, पुणे एवं विश्वकर्मा विश्वविद्यालय, पुणे के सहयोग से बी.ए., एम.ए. तथा पीएच.डी. स्तर पर अध्ययन एवं शोध के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
अब तक संस्था के माध्यम से 146 विद्यार्थियों ने डिग्री प्राप्त की है, जबकि वर्तमान में 112 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इसके अतिरिक्त, प्राकृत, संस्कृत, ब्राह्मी लिपि, देवनागरी लिपि, इंग्लिश स्पीकिंग एवं थोकड़ा जैसे विभिन्न प्रमाणपत्र पाठ्यक्रमों के माध्यम से 1,000 से अधिक विद्यार्थियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।
शोध को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विश्वकर्मा विश्वविद्यालय, पुणे एवं जैन विश्वविद्यालय, बेंगलुरु के सहयोग से पीएच.डी. कार्यक्रम भी संचालित किया जा रहा है, जिसमें वर्तमान में 21 शोधार्थी शोधकार्य कर रहे हैं। इनके मार्गदर्शन के लिए तीन रिसर्च गाइड एवं एक रिसर्च डायरेक्टर कार्यरत हैं।
मंगलाचरण एवं आशीर्वचनों से हुआ समारोह का शुभारंभ – समारोह का प्रथम सत्र वर्धमान प्रतिष्ठान, सेनापति बापट रोड, शिवाजीनगर, पुणे में प्रातः 9 बजे मंगलाचरण एवं स्वागत गीत के साथ प्रारंभ हुआ।
इस अवसर पर प.पू. डॉ. श्री अनुपमाजी म.सा. आदि ठाणा-4 का पावन सान्निध्य प्राप्त हुआ। उनके मंगलमय प्रवचनों एवं आशीर्वचनों से उपस्थित जनसमुदाय लाभान्वित हुआ।
संस्था की शैक्षणिक, सामाजिक एवं शोध संबंधी गतिविधियों का विस्तृत परिचय मुख्य समन्वयक एवं ट्रस्टी सौ. अर्चना अमोल लुणावत ने प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
उन्होंने संस्था की उपलब्धियों, विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति तथा प्राकृत एवं जैन अध्ययन के प्रचार-प्रसार हेतु किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी।
इस अवसर पर लेफ्टिनेंट कर्नल डॉ. प्रताप संचेती (सेवानिवृत्त), कन्सल्टंट न्यूरोलॉजिस्ट ने विशेष प्रबोधन प्रस्तुत किया। उनके प्रेरणादायी विचारों ने उपस्थित विद्यार्थियों एवं अतिथियों को मार्गदर्शन प्रदान किया।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए तथा अध्यापकों का सम्मान किया गया। संस्था के सचिव श्री विलास राठोड ने आगामी शैक्षणिक योजनाओं एवं संस्थान की भावी गतिविधियों की रूपरेखा प्रस्तुत की।
विश्वकर्मा विश्वविद्यालय में 41 विद्यार्थियों को मिली डिग्री –
दीक्षांत समारोह का द्वितीय सत्र विश्वकर्मा विश्वविद्यालय, कोंढवा, पुणे में आयोजित किया गया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के चेयरमैन श्री भरत अग्रवाल, श्रीमती गौरी किर्लोस्कर सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही।
समारोह में एम.ए. प्राकृत एण्ड जैन स्टडीज के 31 तथा बी.ए. प्राकृत एण्ड जैन स्टडीज के 10, इस प्रकार कुल 41 विद्यार्थियों को डिग्री प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।
यह उपलब्धि संस्था के शैक्षणिक प्रयासों एवं विद्यार्थियों की मेहनत का महत्वपूर्ण प्रमाण रही। इस वर्ष विद्यार्थियों की उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए विश्वविद्यालय की ओर से दो गोल्ड मेडल प्रदान किए गए।
एम.ए. की छात्रा मयुरी संजय चोरडिया तथा बी.ए. की छात्रा बरखा बांठिया को गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया। इस गौरवपूर्ण उपलब्धि से हर्ष का वातावरण रहा।
एम.ए. एवं बी.ए. के डिग्रीधारकों के नाम –
एम.ए. प्राकृत एण्ड जैन स्टडीज: मयुरी चोरडिया, शिल्पा भळगट, कविता भंडारी, संगीता लोढा, ममता सरनोत, सुनिता शिंगवी, साधना गुंदेचा, सोनल जैन, हिना कांकरिया, किरण जैन, जीनल अजमेरा, नमिता बाफना, सोनाली शहा, प्रतिभा भंडारी, संगिता मुनोत, सीमा कटारिया, छाया ओसवाल, वैशाली कोटेचा, तेजस्विनी भोकरे, अंजली पिचा, नीता देवडा, अकांक्षा गांधी, संध्या मुनोत, पूनम गदिया, इंदु चोरडिया, रूपा नहार, उल्का सुराणा, स्वाती राठोड, मोनाली कोचर, वर्षा चोरडिया एवं शितल कटारिया।
बी.ए. प्राकृत एण्ड जैन स्टडीज के नाम :
बरखा बांठिया, चंदा मंडलेचा, निलम जैन, रमेश भालेराव, माधुरी बलदोटा, सीमा भंडारी, प्रिया सेठिया, विनिता नहार, चैताली सोलंकी एवं प्रीति चौधरी।
सभी डिग्री प्राप्त विद्यार्थियों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ दी गईं। यह समारोह विद्यार्थियों की शैक्षणिक यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव सिद्ध हुआ।
गणमान्य अतिथियों की रही गरिमामय उपस्थिति –
समारोह में संस्था की अध्यक्षा मधुबाला चोरडिया, उपाध्यक्ष विमल बाफना, उपसचिव सुमतिलाल लोढा, ट्रस्टीगण कुंदनमल दरडा, अशोक पगारिया, निर्मला छाजेड, ललिता ओस्तवाल एवं निर्मला कांकरिया सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति, शिक्षक, विद्यार्थी एवं अभिभावक उपस्थित रहे।
भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण-संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल –
वर्धमान एज्युकेशन एण्ड रिसर्च इन्स्टिट्यूट, पुणे प्राकृत एवं जैन स्टडीज के माध्यम से भारतीय प्राचीन साहित्य, भाषा, दर्शन, संस्कृति एवं नैतिक मूल्यों के संरक्षण और संवर्धन के लिए निरंतर प्रयासरत है।
संस्था शिक्षा के साथ-साथ संस्कार, शोध एवं ज्ञान के प्रसार को भी समान महत्व देती है।पंचम दीक्षांत समारोह संस्था की शैक्षणिक यात्रा की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में संपन्न हुआ।
यह समारोह न केवल विद्यार्थियों के जीवन में नई संभावनाओं के द्वार खोलता है, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने के संकल्प को भी सुदृढ़ करता है।
संस्था ने भविष्य में भी प्राकृत एवं जैन अध्ययन के क्षेत्र में उत्कृष्ट शैक्षणिक एवं शोध गतिविधियों को आगे बढ़ाने का संकल्प व्यक्त किया।
