अहिंसा, अपरिग्रह और अनेकांतवाद ही मानवता का भविष्य सुरक्षित कर सकते हैं
महाराष्ट्र जैन वार्ता
पुणे : करुणामूर्ति भगवान महावीर स्वामी द्वारा प्रतिपादित अहिंसा, अपरिग्रह और अनेकांतवाद के सिद्धांत आज के वैश्विक संकट के दौर में अत्यंत प्रासंगिक हो गए हैं। विश्व शांति और मानवता की रक्षा के लिए इन सिद्धांतों को अपनाना समय की मांग बन चुकी है।
चैत्र शुक्ल त्रयोदशी (31 मार्च, मंगलवार) को चरम तीर्थपति भगवान महावीर स्वामीजी का 2624वां जन्मकल्याणक श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। देश-विदेश में श्वेतांबर, दिगंबर, स्थानकवासी और तेरापंथी-इन चारों संप्रदायों के जैन अनुयायी इस पावन अवसर पर सेवा और करुणा के विविध कार्य करेंगे। इस दिन भिक्षुकों को भोजन, पशुओं को चारा, छाछ केंद्र, अस्पतालों में फल वितरण जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से मानवता और दया का संदेश दिया जाएगा।
भगवान महावीर स्वामीजी ने अहिंसा, अपरिग्रह और कर्म सिद्धांत को अत्यंत सूक्ष्म और गहन रूप में समझाया। उनके अनुसार जो तीनों काल-भूत, वर्तमान और भविष्य-का पूर्ण ज्ञान रखता है, वही सर्वज्ञ कहलाता है। वर्धमान कुमार ने 30 वर्ष की आयु में राज-पाट का त्याग कर दीक्षा ग्रहण की।
साढ़े बारह वर्षों तक कठोर साधना करते हुए उन्होंने अनेक उपसर्ग और परीषह सहन किए। चंडकौशिक सर्प का दंश, अग्नि की पीड़ा, संगमदेव द्वारा कष्ट तथा ग्वाले द्वारा कान में कील ठोकने जैसी घटनाओं के बावजूद उन्होंने करुणा और क्षमा का मार्ग नहीं छोड़ा।
साधना के पश्चात वैशाख शुक्ल दशमी को उन्होंने घाती कर्मों का नाश कर केवलज्ञान प्राप्त किया और लगभग 30 वर्षों तक प्रवचन देकर लाखों जीवों का कल्याण किया। भगवान महावीर और गौतम बुद्ध समकालीन थे।
बौद्ध ग्रंथों में भी महावीर स्वामी की सर्वज्ञता का उल्लेख मिलता है। जैन दर्शन के अनुसार शब्द भी “पुद्गल” (भौतिक) हैं, जिसे आधुनिक विज्ञान ने भी स्वीकार किया है। रेडियो, टीवी और मोबाइल जैसी तकनीकें इसका उदाहरण हैं।
तत्त्वार्थ सूत्र और जीवाभिगम सूत्र में वर्णित जीव विज्ञान और पर्यावरण संबंधी सिद्धांत आज के वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी मेल खाते हैं। भगवान महावीर स्वामीजी ने हजारों वर्ष पूर्व ही पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया-किसी भी जीव को हानि न पहुंचाना, जल, वायु और पृथ्वी को प्रदूषित न करना तथा सभी जीवों के प्रति करुणा रखना।
वर्तमान समय में विश्व में बढ़ते संघर्ष-जैसे रूस-यूक्रेन और इज़राइल-ईरान के बीच तनाव-मानवता के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। यदि ये परिस्थितियाँ नियंत्रित नहीं हुईं, तो तीसरे विश्वयुद्ध की आशंका भी बढ़ सकती है।
आज दुनिया को “एटम बम” नहीं, बल्कि “पीस (शांति) मिसाइल” की आवश्यकता है। यदि भगवान महावीर के सिद्धांतों को अपनाया जाए, तो विनाशकारी हथियार स्वतः निरर्थक हो जाएंगे। अतः महावीर जन्मकल्याणक के अवसर पर यह संकल्प लेने की आवश्यकता है कि हम अहिंसा, अपरिग्रह, विश्वमैत्री, सदाचार और करुणा को अपने जीवन में अपनाकर मानवता और पर्यावरण की रक्षा करेंगे। वास्तव में, आज के वर्तमान को “वर्धमान” (महावीर) की अत्यंत आवश्यकता है।


















