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तेरापंथ की आध्यात्मिक राजधानी लाडनूं में ज्ञान, साधना और तप का महासंगम

maharashtra jain warta • Maharashtra Jain Warta • July 18, 2026
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लाडनूं (राजस्थान) : तेरापंथ धर्मसंघ की आध्यात्मिक राजधानी लाडनूं इन दिनों आध्यात्मिक चेतना, साधना और स्वाध्याय का प्रमुख केंद्र बनी हुई है। प. पू. आचार्य श्री महाश्रमणजी म. सा. के सान्निध्य में इस वर्ष का चातुर्मास आयोजित होने जा रहा है। योगक्षेम वर्ष के अंतर्गत लगभग 80 साधु, 378 साध्वियाँ तथा 55 से अधिक समणीजी जैन आगम का गहन अध्ययन कर रहे हैं और विशेष प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।

प. पू. आचार्य श्री महाश्रमणजी म. सा. प्रतिदिन साधु-साध्वी समाज को जैन आगम के मूल सिद्धांतों, दर्शन तथा आचार-विचार का गहन अध्ययन करा रहे हैं।

इस प्रशिक्षण का उद्देश्य यह है कि धर्मसंघ के संत एवं साध्वीगण भविष्य में विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित होने वाले चातुर्मास एवं प्रवास के दौरान आगम के शुद्ध, प्रामाणिक और जीवनोपयोगी संदेशों को समाज के प्रत्येक वर्ग तक प्रभावी ढंग से पहुँचा सकें।

तेरापंथ धर्मसंघ में योगक्षेम वर्ष केवल अध्ययन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि साधना, आत्मानुशासन, चिंतन और आध्यात्मिक विकास का महाअभियान माना जाता है।

धर्मसंघ के प्रत्येक आचार्य ने इस गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए साधु-साध्वी समाज के ज्ञान और आध्यात्मिक क्षमता को सुदृढ़ करने का कार्य किया है।

प. पू. आचार्य श्री महाश्रमणजी म. सा. के नेतृत्व में चल रहा वर्तमान योगक्षेम वर्ष आध्यात्मिक चेतना का प्रेरणादायी स्वरूप है। इस आध्यात्मिक आयोजन के दर्शन एवं लाभ के लिए देशभर से हजारों श्रद्धालु लाडनूं पहुँच रहे हैं।

संपूर्ण वातावरण मंत्रोच्चार, स्वाध्याय, साधना और अनुशासन से ओत-प्रोत दिखाई दे रहा है। यह आयोजन केवल तेरापंथ धर्मसंघ के लिए ही नहीं, बल्कि समूचे जैन समाज के लिए आध्यात्मिक जागरण, ज्ञान संवर्धन और संस्कार निर्माण का प्रेरणास्रोत बन गया है।