ईशा पर्ल सोसाइटी में दो महान संतों का ऐतिहासिक समागम
जैन संघ की पेढ़ी का हुआ उद्घाटन
महाराष्ट्र जैन वार्ता
पुणे : ईशा पर्ल सोसाइटी में मंगलवार को आध्यात्मिक आस्था, भक्ति और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब प. पू. श्रीमद् आचार्य विमल बोधि सूरीश्वरजी म. सा. एवं राष्ट्रीय संत प. पू. नरेश मुनिजी म. सा. का ऐतिहासिक संत समागम संपन्न हुआ। इस अवसर पर दोनों संतों के सान्निध्य से संपूर्ण क्षेत्र भक्तिमय वातावरण से सराबोर हो गया।
उल्लेखनीय है कि प. पू. आचार्य विमल बोधि सूरीश्वरजी म. सा. का चातुर्मास प्रवेश गत 15 जुलाई को ईशा पर्ल सोसाइटी में भव्य शोभायात्रा एवं धार्मिक कार्यक्रमों के साथ संपन्न हुआ था।
इसी क्रम में राष्ट्रीय संत प. पू. नरेश मुनिजी म. सा. एवं साध्वीवृंद के पावन आगमन से श्रद्धालुओं को दो महान संतों के एक साथ दर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त करने का सौभाग्य मिला।
इस पावन अवसर पर पूज्य संतों के कर-कमलों से ईशा पर्ल जैन संघ की नवीन पेढ़ी (संघ कार्यालय) का विधिवत उद्घाटन किया गया। संतों ने संघ के ट्रस्टियों एवं पदाधिकारियों को धर्म-प्रभावना के कार्यों में निरंतर सक्रिय रहने का आशीर्वाद देते हुए समाजहित एवं धर्मसेवा के लिए प्रेरित किया।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय संत प. पू. नरेश मुनिजी म. सा.ने अत्यंत प्रेरणादायी संदेश देते हुए कहा, “यदि जीवन की गलत बस में बैठे हैं, तो चातुर्मास वह उचित स्टॉप है, जहाँ उतरकर सही दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।
पापों का प्रायश्चित कर धर्म और संयम के मार्ग पर चलने से ही मोक्ष का पथ प्रशस्त होता है।” उनके इस सरल एवं प्रभावशाली उदाहरण ने उपस्थित श्रद्धालुओं को गहराई से प्रभावित किया।
गुरुदेव ने अपने प्रवचन में परोपकार को सर्वोच्च पुण्य बताते हुए कहा कि किसी भी जीव को दुःख न पहुँचाना ही वास्तविक धर्म है। उन्होंने दान, शील, तप एवं संयम के माध्यम से क्रोध, मान, माया और लोभ जैसे कषायों पर विजय प्राप्त करने का संदेश दिया।
धर्मसभा में जानकारी दी गई कि 26 जुलाई को प. पू. नरेश मुनिजी म. सा. का भव्य प्रवेश पुष्कर धाम में होगा। साथ ही, 4 अगस्त से ईशा पर्ल में प्रारंभ होने वाली ‘सिद्धि तप’ आराधना में अधिक से अधिक श्रावक-श्राविकाओं से सहभागी बनने का आह्वान किया गया।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित श्रद्धालुओं ने संतों के मुखारविंद से मंगलपाठ का श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त किया। पूरे आयोजन का सफल संचालन ईशा पर्ल जैन संघ के तत्वावधान में किया गया।
इस भव्य एवं गरिमामय आयोजन के लिए समाजजनों ने अशोक ताराचंद छाजेड़ परिवार एवं ईशा पर्ल जैन संघ की भावपूर्ण अनुमोदना की तथा सभी सहयोगियों का अभिनंदन किया।
