साध्वी विश्वदर्शनाजी एवं तपस्विनी कीर्तीसुधाजी महासतीजी का भव्य मंगल प्रवेश
महाराष्ट्र जैन वार्ता
नेवासा फाटा (अहिल्यानगर) : भानस हिवरा गाँव में प्रखर व्याख्याता साध्वी श्री विश्वदर्शनाजी महासतीजी एवं तपस्विनी साध्वी श्री कीर्तीसुधाजी महासतीजी का भव्य एवं ऐतिहासिक मंगल प्रवेश अत्यंत श्रद्धा, उत्साह और भक्ति के वातावरण में संपन्न हुआ।
जैन स्थानकवासी संप्रदाय के मात्र 20 परिवारों वाले इस छोटे से गाँव में मंगल प्रवेश के अवसर पर लगभग 600 से 700 श्रद्धालुओं की विशाल उपस्थिति ने कार्यक्रम को अविस्मरणीय बना दिया।
इस मंगल प्रवेश में अहिल्यानगर, नारायणगाँव, घोड़नदी, सावेडी, नाशिक, श्रीरामपुर, पुणे और टाकळी ढोकेश्वर सहित अनेक नगरों एवं गाँवों से बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं तथा महिला मंडलों ने भाग लेकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
महिलाओं, बहनों एवं बेटियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता ने पूरे वातावरण को धर्ममय बना दिया। मंगल प्रवेश के उपरांत अपने प्रथम प्रवचन में साध्वी श्री विश्वदर्शनाजी महासतीजी ने मराठी एवं हिंदी, दोनों भाषाओं में ‘प्रवेश’ शब्द का आध्यात्मिक अर्थ समझाते हुए कहा कि ‘प्र’ अर्थात् प्रमाद का त्याग, ‘वे’ अर्थात् जीवन में सकारात्मक वेग और ‘श’ अर्थात् शांति।
उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति अपने जीवन से प्रमाद को दूर कर सही दिशा में आगे बढ़ते हुए शांति को अपनाए, तो उसका जीवन सफल और सार्थक बन सकता है।
इस अवसर पर आसपास के अनेक गाँवों के जैन संघों ने भी बड़ी संख्या में उपस्थित होकर धर्मसभा की गरिमा बढ़ाई। भानस हिवरा श्रीसंघ द्वारा बाहर से पधारे सभी अतिथियों एवं श्रद्धालुओं के लिए उत्कृष्ट भोजन, आवास एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाएँ की गईं, जिनकी सभी ने मुक्तकंठ से सराहना की।
भव्य मंगल प्रवेश एवं प्रेरणादायी प्रवचन से भानस हिवरा गाँव धर्ममय वातावरण से गुंजायमान हो उठा। श्रद्धालुओं ने साध्वी-वृंद के सान्निध्य का लाभ प्राप्त कर अपने जीवन को धन्य माना।
