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इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट वाले क्षेत्रों में जमीन खरीदना फायदेमंद

maharashtra jain warta • Maharashtra Jain Warta • July 30, 2026
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पुणे : जमीन या रियल एस्टेट में निवेश करना हमेशा से सुरक्षित और बेहतर रिटर्न देने वाला विकल्प माना जाता है। विशेष रूप से जब किसी क्षेत्र में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर (बुनियादी ढांचे) के प्रोजेक्ट आकार ले रहे हों, तब वहां की जमीनों में निवेश भविष्य में बेहद लाभदायक साबित हो सकता है। पुणे के सुप्रसिद्ध उद्योगपति तथा संतोष ग्रुप के डायरेक्टर संतोष जैन ने इसे सुरक्षित और फायदेमंद निवेश का सफल सूत्र बताया है।

उन्होंने कहा कि पुणे और उसके आसपास का क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है। इससे जमीन की मांग लगातार बढ़ रही है और आने वाले समय में इसमें और वृद्धि होने की संभावना है।

ऐसे में निवेश का आकर्षण स्वाभाविक है, लेकिन कानूनी सलाह और विशेषज्ञों की मदद से दस्तावेजों की जांच करना भी उतना ही आवश्यक है।

विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान में पुणे और आसपास के क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं विकसित हो रही हैं। पुरंदर क्षेत्र में नए अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का कार्य प्रगति पर है, वहीं पीएमआरडीए के अंतर्गत विकास कार्यों के साथ रिंग रोड का निर्माण भी तेजी से चल रहा है।

इन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं के कारण पुरंदर और रिंग रोड से सटे क्षेत्र भविष्य में बड़े ट्रांसपोर्ट, व्यापार, लॉजिस्टिक्स और नई टाउनशिप के प्रमुख केंद्र बनेंगे।

इससे इन क्षेत्रों की जमीनों के दाम आने वाले समय में तेजी से बढ़ने की संभावना है। इसलिए आज यहां निवेश के उद्देश्य से जमीन खरीदना और भविष्य में उचित मूल्य पर बेचना आर्थिक रूप से अत्यंत लाभदायक सिद्ध हो सकता है।

भवानी पेठ स्थित लगभग 45 वर्षों से विश्वसनीय संस्था संतोष स्टील्स एवं संतोष ग्रुप के डायरेक्टर संतोष जैन ने अपने अनुभव के आधार पर बताया कि जमीन में निवेश जितना लाभदायक दिखाई देता है, उतना ही सावधानीपूर्वक करना भी आवश्यक है।

थोड़ी-सी लापरवाही भविष्य में कानूनी विवादों का कारण बन सकती है। इसलिए जमीन खरीदते समय कुछ महत्वपूर्ण बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

निवेश से पहले जमीन के मालिकाना हक का 7/12 (सात-बारा) उतारा सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है। इसमें दर्ज नाम, क्षेत्रफल, जमीन का प्रकार (सिंचित/असिंचित) तथा उस पर दर्ज किसी भी प्रकार के ऋण या अन्य भार की जांच अवश्य करें।

साथ ही, 7/12 पर प्रविष्टियां किस आधार पर हुई हैं, जैसे उत्तराधिकार, खरीद-बिक्री आदि, इसे समझने के लिए पिछले 30 से 40 वर्षों के फेरफार (दाखिला) उतारों की जांच भी आवश्यक है।

जमीन से संबंधित सभी लेन-देन हमेशा चेक या ऑनलाइन बैंकिंग के माध्यम से ही करें। बिक्री विलेख (सेल डीड) का विधिवत पंजीकरण कराएं तथा निर्धारित स्टांप शुल्क का भुगतान अवश्य करें।