रतलाम में धर्म और भक्ति का महासंगम
प. पू. सुमनप्रभाजी म. सा. की 9 दिवसीय मौन साधना पूर्ण : महामांगलिक सुनने उमड़ा जनसैलाब
महाराष्ट्र जैन वार्ता
रतलाम : रतलाम में श्रमण संघीय प्रवर्तक प. पू. श्री प्रकाशमुनिजी म.सा. के चातुर्मास के दौरान रविवार को धर्म और भक्ति का विशेष संगम देखने को मिला। प्रवचन प्रभाविका उपप्रवर्तिनी प. पू. श्री सुमनप्रभाजी म.सा. ने नौ दिवसीय मौन साधना पूर्ण कर महामांगलिक प्रदान की। इसके श्रवण के लिए देश के विभिन्न शहरों और क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु रतलाम पहुंचे। इस अवसर पर महाराष्ट्र सौरभ महासती प. पू. श्री चांदकुंवरजी म. सा. की 103वीं दीक्षा जयंती भी उत्साहपूर्वक मनाई गई। साथ ही, गुरु मां चांदकुंवरजी की जन्म जयंती के उपलक्ष्य में भव्य ‘सौभाग्य कला उत्सव प्रदर्शनी’ का आयोजन किया गया।
जय-जयकार के साथ निकला चल समारोह – उपप्रवर्तिनी प. पू. श्री सुमनप्रभाजी म. सा. की नौ दिवसीय मौन साधना की पूर्णता के अवसर पर मोहन टॉकीज स्थित श्री सौभाग्य प्रकाश दरबार में विशेष धार्मिक आयोजन हुआ। इससे पूर्व चौमुखी पुल स्थित डीपीके परिसर से जय-जयकार के साथ भव्य चल समारोह निकाला गया। इसमें उपप्रवर्तिनी प. पू. श्री सुमनप्रभाजी म. सा. के साथ अन्य महासतियों और समाजजनों ने भाग लिया। चल समारोह के श्री सौभाग्य प्रकाश दरबार पहुंचने के बाद धर्मसभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर खरगोन, करई, पुणे, धुलिया, नासिक, वसंत पीपलगांव, वाशी, भाईंदर, मुंबई के घाटकोपर, लिमड़ी, मेघनगर, बदनावर, खाचरौद, कुशलगढ़, थांदला, उज्जैन और इंदौर सहित अनेक स्थानों से गुरुभक्त रतलाम पहुंचे।
प्रवर्तकश्री ने बताया महासतीवृंद का योगदान – धर्मसभा में श्रमण संघीय प्रवर्तक प. पू. श्री प्रकाशमुनिजी म. सा. ने धर्म प्रभावना में महासतीवृंद के योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संघ में चार प्रवर्तिनी पदों की स्थापना की गई थी और इन सभी का परिवार आज भी धर्म के प्रचार-प्रसार में योगदान दे रहा है। साध्वियों ने सदैव संघ की गरिमा बढ़ाई है और अपने ज्ञान तथा साधना के बल पर जिनशासन की प्रभावना की है। गुरु के प्रति उनका समर्पण भी प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि संसार में निःस्वार्थ भाव से सेवा करने वालों को आशीर्वाद प्राप्त होते हैं। ये आशीर्वाद जीवन को नई दिशा देते हैं और व्यक्ति का जीवन आनंद से भर देते हैं। धर्मसभा को प. पू. श्री दर्शनमुनिजी म. सा., महासती प. पू. श्री चांदकुंवरजी म. सा. एवं श्री प. पू. स्वर्णाश्रीजी म. सा. ने भी संबोधित किया। प. पू. श्री देवेन्द्रप्रभाजी म. सा. और प. पू. श्री विभाश्रीजी म. सा. की उपस्थिति में नवदीक्षित महासती प. पू. श्री तेजस्विनीजी म. सा. ने स्तवन प्रस्तुत किया। उपप्रवर्तिनी प. पू. श्री सुमनप्रभाजी म. सा. ने अपने उद्बोधन में कहा कि आत्मकल्याण के लिए साधना श्रेष्ठ माध्यम है। प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में साधना और आत्मचिंतन को स्थान देना चाहिए।
चातुर्मास के दौरान मिली विनतियों पर प्रवर्तकश्री का जवाब – इस अवसर पर लिमड़ी के हंसमुख भाई गोलेचा और मेघनगर के विनोद बाफना ने अपने भाव व्यक्त करते हुए प्रवर्तकश्री से डूंगर पधारने की विनती की। सूरत निवासी हस्तीमलजी धोका ने भी अपने विचार रखे। इन विनतियों के प्रत्युत्तर में प्रवर्तकश्री ने कहा कि चातुर्मास के दौरान की गई सभी विनतियां उनकी झोली में हैं। कार्यक्रम में श्री धर्मदास जैन श्रीसंघ, श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल ट्रस्ट, श्री सौभाग्य तीर्थ ट्रस्ट, श्री सौभाग्य जैन नवयुवक मंडल, श्री सौभाग्य प्रकाश युवक मंडल, बालक-बालिका मंडल, महिला मंडल तथा श्री सौभाग्य जैन महिला मंडल के सदस्य उपस्थित रहे। अंत में डीपीके परिवार, गांधी परिवार एवं चातुर्मास समिति की ओर से प्रभावना का वितरण किया गया।
महासती प. पू. श्री चांदकुंवरजी म. सा. की 103वीं दीक्षा जयंती मनाई – रविवार को श्री सौभाग्य प्रकाश दरबार में प्रवर्तक प. पू. श्री प्रकाशमुनिजी म. सा. की निश्रा में महाराष्ट्र सौरभ महासती श्री चांदकुंवरजी मसा की 103वीं दीक्षा जयंती उत्साह और उल्लास के साथ मनाई गई। ‘भाग्य से सौभाग्य की ओर’ चातुर्मास समिति की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर महासतीश्री के प्रति श्रद्धा व्यक्त की।
सौभाग्य कला उत्सव प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र – गुरु मां प. पू. श्री चांदकुंवरजी म. सा. की जन्म जयंती के अवसर पर प. पू. श्री स्वर्णाश्रीजी म. सा. की प्रेरणा से ‘सौभाग्य कला उत्सव’ प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इस आयोजन को सफल बनाने में प. पू. श्री दर्शनमुनिजी म. सा. के मार्गदर्शन में कुश चोरड़िया, गोयम मेहता, नैतिक बोरा सहित सौभाग्य प्रकाश युवा भक्त मंडल के सदस्यों ने सराहनीय योगदान दिया। प्रदर्शनी के उद्घाटन का लाभ गुरु मां चांदकुंवरजी म. सा. एवं उपप्रवर्तिनी प. पू. श्री सुमनप्रभाजी म.सा. के सांसारिक पौत्र, पुणे के शेंदुर्णी निवासी शैलेश आगरचंद बेदमुथा परिवार ने लिया। सुबह से शाम तक श्री सौभाग्य प्रकाश दरबार में प्रदर्शनी देखने के लिए स्थानीय एवं बाहरी क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। धार्मिक आस्था, कला और गुरु भक्ति के अनूठे संगम ने इस आयोजन को विशेष बना दिया।
