प्रो. डॉ. संजय बी. चोरडिया ने किए दर्शन : महिलाओं के योगदान को सराहा
महाराष्ट्र जैन वार्ता
पुणे : सुर्यदत्ता एजुकेशन फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष एवं चेयरमैन प्रो. डॉ. संजय बी. चोरडिया तथा सुर्यदत्ता ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अक्षित कुशल ने बावधन स्थित सिद्धीचा गणपति के दर्शन कर महाआरती में सहभाग लिया। इस अवसर पर डॉ. चोरडिया ने मंडल की सजावट और संगठन में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की।
इस वर्ष सिद्धीचा गणपति मंडल की सजावट अयोध्या के राम मंदिर की थीम पर आधारित रही, जिसमें राम मंदिर की भव्य प्रतिकृति और भगवान श्रीराम की आकर्षक प्रतिमा स्थापित की गई। इस दिव्य सजावट ने सैकड़ों श्रद्धालुओं को दर्शन और आशीर्वाद के लिए आकर्षित किया।
विशेष उल्लेखनीय बात यह रही कि पिछले तीन वर्षों से यह मंडल 1500 महिलाओं की टीम द्वारा अनुशासन, निष्ठा और सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ सफलतापूर्वक संचालित किया जा रहा है। अध्यक्ष श्रीमती पियुषा दगडे पाटिल और श्री किरण दगडे के नेतृत्व में महिला समिति बनुमति महादेवन, सीमा राव, दिव्या खैतान, हेमलता, बबीता श्रीवास्तव और सजावट, सांस्कृतिक कार्यक्रम, स्वच्छता, भीड़ प्रबंधन और अन्य व्यवस्थाओं का उत्कृष्ट समन्वय करती है। इन प्रयासों से मंडल को लगातार दो वर्षों से पीसीएमसी आयुक्त के हाथो पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।
सिद्धीचा गणपति मंडल केवल आस्था का केंद्र ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक मंच भी है। यहाँ नृत्य, संगीत, सुंदरकांड पाठ जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक उपक्रमों का आयोजन होता है, जिससे बावधन और पुणे की समाजरचना में एकता का संदेश प्रसारित होता है। प्रतिदिन आरती व प्रसाद वितरण के माध्यम से समाज के सभी परिवारों को सहभागी बनाया जाता है।
इस अवसर पर प्रो. डॉ. संजय बी. चोरडिया ने उमेश वर्जे, किरण दगडे और पियुषा दगडे को पौधा और प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया। इस सम्मान के प्रत्युत्तर में दगडे परिवार ने भी डॉ. चोरडिया एवं अक्षित कुशल का अभिनंदन किया। इस पारस्परिक अभिनंदन ने आपसी सौहार्द, सम्मान और एकता का संदेश दिया।
समारोह को संबोधित करते हुए प्रो. डॉ. संजय बी. चोरडिया ने कहा : “राम मंदिर थीम श्रद्धा और प्रेरणा का प्रतीक है। अयोध्या नहीं जा पाने वाले भक्त भी यहाँ उसी आध्यात्मिक अनुभूति का अनुभव कर सकते हैं। इतने बड़े पैमाने पर महिलाओं का एकजुट होकर यह आयोजन करना समाज के लिए प्रेरणादायी है।
यह सेवा भाव और सांस्कृतिक एकता समाज को मजबूत बनाती है। गणेशोत्सव केवल भक्ति का ही नहीं बल्कि सेवा, एकता और समाज को लौटाने का पर्व है।” उन्होंने आगे कहा कि ऐसे उत्सव आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा दें और समाज में सांस्कृतिक व सामाजिक एकता को बढ़ावा दें।
प्रो. डॉ. चोरडिया की उपस्थिति से श्रद्धालुओं में उत्साह और अधिक बढ़ा। उन्होंने महिला मंडल की मेहनत व अनुशासित कार्यशैली की खुलकर सराहना की, जिसने इस वर्ष का गणेशोत्सव एक अविस्मरणीय और आध्यात्मिक अनुभव बना दिया।















