पहले सोचें, फिर बोलें : प. पू. प्रवीणऋषिजी म. सा.
महाराष्ट्र जैन वार्ता पुणे : हम जो शब्द बोलते हैं, वे किसी का भविष्य उज्ज्वल बना सकते हैं या उसके जीवन में अंधकार भी ला सकते हैं, इसलिए बोलने से पहले विचार करना आवश्यक है। शब्द किसी शस्त्र के समान होते हैं। इनसे किसी का जीवन संवारा जा सकता है, तो किसी का जीवन बिगाड़ा … Read more