आवृत्ती पुणे

पहले सोचें, फिर बोलें : प. पू. प्रवीणऋषिजी म. सा.

महाराष्ट्र जैन वार्ता पुणे : हम जो शब्द बोलते हैं, वे किसी का भविष्य उज्ज्वल बना सकते हैं या उसके जीवन में अंधकार भी ला सकते हैं, इसलिए बोलने से पहले विचार करना आवश्यक है। शब्द किसी शस्त्र के समान होते हैं। इनसे किसी का जीवन संवारा जा सकता है, तो किसी का जीवन बिगाड़ा … Read more

नव चैतन्य सामाजिक संस्था द्वारा समाज भूषण और समाज शिरोमणि सम्मान समारोह संपन्न

प. पू. प्रशांतऋषिजी म. सा. एवं विजयस्मिताजी म. सा. की पावन उपस्थिति में भव्य आयोजन महाराष्ट्र जैन वार्ता पुणे : नव चैतन्य सामाजिक संस्था, चिकली के तत्वावधान में, प. पू. प्रशांतऋषिजी म. सा. एवं विजयस्मिताजी म. सा. की पावन उपस्थिति में समाज भूषण और समाज शिरोमणि सम्मान समारोह का आयोजन हुआ। इस अवसर पर समाज … Read more

नव चैतन्य सामाजिक संस्था द्वारा समाज भूषण और समाज शिरोमणि सम्मान समारोह संपन्न

प. पू. प्रशांतऋषिजी म. सा. एवं विजयस्मिताजी म. सा. की पावन उपस्थिति में भव्य आयोजन महाराष्ट्र जैन वार्ता पुणे : नव चैतन्य सामाजिक संस्था, चिकली के तत्वावधान में, प. पू. प्रशांतऋषिजी म. सा. एवं विजयस्मिताजी म. सा. की पावन उपस्थिति में समाज भूषण और समाज शिरोमणि सम्मान समारोह का आयोजन हुआ। इस अवसर पर समाज … Read more

ज्ञान के लिए जो चलता है वही है विद्यार्थी : प. पू. प्रवीणऋषिजी म. सा.

महाराष्ट्र जैन वार्ता पुणे : मनुष्य वही होता है, जो अपने इच्छित लक्ष्य तक पहुँचने के लिए चलता है। साधक साधना के लिए चलता है, कोई भक्त भक्ति के लिए चलता है, और विद्यार्थी वही होता है, जो ज्ञान की तलाश में चलता है। इसलिए, जब भी मैं कोई क्रिया करने जा रहा हूँ, तो … Read more

शरीर को बनाएं धर्म का मंदिर : प. पू. प्रवीणऋषिजी म. सा.

महाराष्ट्र जैन वार्ता पुणे : आप अपने शरीर को भोग का केंद्र बना सकते हैं या रोग का भी केंद्र बना सकते हैं। हमें अपनी शक्ति को शरीर को धर्म का केंद्र बनाने में लगाना चाहिए। एक बार जब शरीर धर्म का मंदिर बन जाता है, तो मन अपने-आप वहीं स्थिर हो जाता है, इधर-उधर … Read more

जीवन में दृष्टि और दृष्टिकोण का होना आवश्यक है : प. पू. प्रवीणऋषिजी म.सा.

महाराष्ट्र जैन वार्ता पुणे : मानव जीवन में दृष्टि और दृष्टिकोण का बहुत महत्व होता है। इस सृष्टि के माध्यम से हम कई चीजों को परखते हैं और अपने भीतर समाहित करते हैं। इसलिए जीवन में यह समझना बहुत ज़रूरी है कि हमें अपने भीतर क्या और किस प्रकार की चीज़ें समाहित करनी हैं। ऐसा … Read more

प्रविणऋषिजी म. सा. और चंदनाजी म.सा. की परिवर्तन चातुर्मास में ऐतिहासिक भेंट

अध्यात्म के क्षितिज पर एक तेजस्वी संगम महाराष्ट्र जैन वार्ता पुणे : वर्धमान सांस्कृतिक केंद्र, गंगाधाम में प. पू. प्रविणऋषिजी म.सा. आदी ठाणा के सान्निध्य में चल रहा परिवर्तन चातुर्मास 2025 एक महान आध्यात्मिक उत्सव बन चुका है। इसी चातुर्मास के एक विशेष प्रसंग पर जैन समाज के दो तेजस्वी दीपों की ऐतिहासिक भेंट संपन्न … Read more

अपना ध्यान शुद्ध और निर्मल रखें : प. पू. प्रवीणऋषिजी म. सा.

महाराष्ट्र जैन वार्ता पुणे : हमारे चलने का जो आधार है, वह ध्यान शुद्ध और निर्मल होना चाहिए। अपने भीतर विचारों की स्पष्टता और दूरदृष्टि होनी चाहिए, ताकि यह भान बना रहे कि हम अंधकार में चल रहे हैं या प्रकाश में। ऐसा वक्तव्य परिवर्तन चातुर्मास २०२५ के अंतर्गत आयोजित प्रवचन माला में प. पू. … Read more