महाराष्ट्र जैन वार्ता : संकेत डुंगरवाल
आकुर्डी : गलती का स्विकार करने के बजाय उसे सुधारने का प्रयास कर गलती दुबारा ना हो यह देखे। किसीपर ॲलिगेशन करने के बजाय उसे करेक्ट करने का साहस दिखाये ऐसा प्रतिपादन आकुर्डी निगडी प्राधिकरण श्री संघ के पधारे अर्हम् विज्जा प्रणेता उपाध्याय प. पु. प्रवीणऋषिजी म. सा. ने मौलिक उद्बोधन किया।
कुर्सी टेंपररी है लेकिन जमीन परमनंन्ट है। सदैव जमीन से जुडे रहने का प्रयास करो। प्रवचन के दरम्यान सभी धर्मप्रेमी माता पिता भाई बहनो ने जमीनपर बैठकर कुर्सी का उपयोग किये बगैर प्रवचन श्रवण किया। धर्मसभा मे पुना जैन सकलसंघ के पिंपरी- चिंचवड जैन सकल संघ के पदाधिकारी, चेन्नई से पधारे भक्तगण एवं समाज के असंख्य भक्तगण उपस्थित थे।
उपाध्याय प्रवर जी की प्रेरणां से मानवसेवा के लिए, जिनशासन के लिए, गौतम निधी, गौतम लब्धि, आनंद तिर्थ, आदिद्वारा किये जानेवाले कार्य मे अनेक महानुभाव अद्रुश्य रुपसे, बिना आगे आये सराहनीय काम करते है, ज्यो कभी अपने नाम के लिए नही बल्कि समाज के उत्थान के लिए सदैव तत्पर रहते है, ऐसे विभुतियों को प्रातिनिधीक रुपमे भामाशा रमणलाल लुंकड के करकमलोद्वारा गौरन्वित किया गया।
सुरेंन्द्र संचेती, सुनील नहार, अनिल नहार, सचिन नहार, राजेंन्द्र मुथा, राजेश मुनोत को नवाजा गया। श्री संघ ओरसे सुभाष ललवाणी ने उपस्थित मान्यवरोंका स्वागत किया और गुरुभगवंतोके प्रति आभार प्रकट किये। जवाहर मुथाने आभार प्रदर्शित किये।
समारोहकी सफलता के लिए नेनसुख मांडोत, विजय गांधी, राजेंन्द्र कटारिया, राजेन्द्र रातडीया, राजेन्द्र छाजेड, हिरालाल लुणावत, राजेंन्द्र खिंवसरा, सचिन गांधी, मदनलाल कोचर, नितीन छाजेड, मोतीलाल चोरडीया, सुर्यकांत मुथीयान, श्रीकांत नहार, मनीषा जैन, चंद्रकांत छाजेड, युवक मंडल के सदस्य आदि ने परिश्रम किये।

















