मन को मातृस्वरूप देखें : प. पू. प्रवीणऋषिजी म. सा.
महाराष्ट्र जैन वार्ता पुणे : हमारा मन शक्तिशाली है, उतना ही चंचल भी है। साथ ही, हम अपने मन को कल्पवृक्ष के समान कह सकते हैं। जब हमारे मन में कोई इच्छा उत्पन्न होती है, तो मन उस इच्छा को पूर्ण करने की शक्ति रखता है। इतना सामर्थ्य हमारे निराकार मन में है। इस मन … Read more