खरा धर्म अखंड प्रवाही : प. पू. प्रवीणऋषिजी म. सा.
महाराष्ट्र जैन वार्ता पुणे : उन्होंने कहा कि वास्तव में धर्म हमेशा अखंड बहते पानी के समान होता है। धर्म निरंतर होना चाहिए। उसे अपनी सुविधा या समय के अनुसार करने का कोई उपयोग नहीं। धर्म को अपनी प्रत्येक क्रिया और आचरण से व्यक्त होना चाहिए। प. पु. प्रवीण ऋषिजी म. सा. ने कहा – … Read more