आवृत्ती , पुणे
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बड़ों का सम्मान और छोटों से स्नेह : परिवार में स्वर्ग का आगमन

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पुणे : श्री संभवनाथ जिनालय, गुलटेकडी श्रावस्ती जैनसंघ पुणे में आयोजित प्रवचन में पं. राजरक्षित विजयजी ने परिवार में संस्कार और स्नेह के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जिस परिवार में बड़ों का सम्मान और छोटों से स्नेह होता है, वहां स्वर्ग का निवास होता है।

उन्होंने समझाया कि जीवन में रिश्ते अस्थायी होते हैं, जैसे रेल्वे प्लेटफार्म पर यात्री अस्थायी रूप से एकत्र होते हैं और ट्रेन आने पर आगे बढ़ जाते हैं। उसी प्रकार, परिवार के रिश्ते भी इस जन्म तक सीमित हैं।

पक्षियों के उदाहरण से उन्होंने बताया कि जैसे शाम को पेड़ पर पक्षी एकत्र होते हैं और सुबह उड़ जाते हैं, वैसे ही जीवन का संबंध भी क्षणिक होता है। पं. राजरक्षित विजयजी ने कहा कि संस्कारशील परिवार वह होता है जहां घर के सदस्य माता-पिता का आदर करते हैं, अतिथियों का स्वागत करते हैं, सद्गुरू का सत्संग और भगवान की भक्ति करते हैं।

हर सदस्य भजन, भोजन, और तीर्थ यात्रा में शामिल रहता है। उन्होंने कहा कि गर्भ संस्कारी परिवार में जन्म लेना बड़े पुण्य का फल होता है। उन्होंने चिंता जताई कि आधुनिक शिक्षा के साथ संस्कार कम हो रहे हैं।

संपत्ति बढ़ रही है, लेकिन सदाचार घट रहा है। साधन बढ़ गए हैं, पर शांति कम हो रही है। आज माता-पिता के संबोधन भी बदल गए हैं । माँ, मम्मी और पिता, डैड बन गए हैं। ऐसे में बच्चों को संस्कार कौन देगा? पं. राजरक्षित विजयजी ने यह सीख दी कि पश्चिम की ओर ढलान करने से अंततः अस्त का समय आता है, क्योंकि सूर्य भी पश्चिम में अस्त होता है।

दिनांक 6 और 7 जनवरी को गुलटेकडी श्रावस्ती जैनसंघ में प्रवचन आयोजित किए गए हैं। 8 से 12 जनवरी तक श्री आदिनाथ सोसाइटी जैनसंघ में प्रवचन का समय सुबह 7:45 से 8:45 बजे तक रहेगा।