गुरुपूर्णिमा, चातुर्मास आरंभ और प. पू. प्रशांतऋषिजी म. सा. का 65वां जन्मोत्सव एक साथ उल्लासपूर्वक संपन्न
महाराष्ट्र जैन वार्ता
पुणे : दापोड़ी जैन स्थानक में इस वर्ष आनंद शिष्य रत्न, जिनशासन प्रभावक, प्रवचन भास्कर प. पू. प्रशांतऋषिजी म. सा. का चातुर्मास अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आनंद के वातावरण में आरंभ हुआ। इस वर्ष का चातुर्मास त्रिवेणी पर्व के रूप में विशेष बन गया, जहाँ एक साथ गुरुपूर्णिमा, चातुर्मास आरंभ, और प. पू. म. सा. का 65वां जन्मोत्सव भव्यता के साथ मनाया गया।
प. पू. प्रशांतऋषिजी म. सा. ने आज से 46 वर्ष पूर्व आचार्य सम्राट आनंदऋषिजी म. सा. के सान्निध्य में संतत्व की दीक्षा प्राप्त की थी। वे आगमवाणी के गहन अध्येता, प्रभावशाली वक्ता, मधुर भजन गायक, श्रेष्ठ कवि एवं कुशल प्रवचनकार के रूप में जाने जाते हैं।
उनके माध्यम से भगवान महावीर के सिद्धांतों का प्रचार-प्रसार देशभर में वर्षों से निरंतर होता आ रहा है। 65वें जन्मोत्सव के पावन अवसर पर विविध धार्मिक अनुष्ठान, गुणगान एवं श्रद्धांजलि कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर डॉ. अशोककुमार पगारिया, दिलीप भंसाली, विलास राठौड़, इच्छाबाई बोरा, राखी छाजेड़, पारस लुंकड़ सहित अन्य कई वक्ताओं ने म. सा. के व्यक्तित्व और योगदान पर भावपूर्ण विचार प्रस्तुत किए और मंगलकामनाएँ प्रकट कीं।
कार्यक्रम की शुरुआत दापोड़ी बहुमंडल द्वारा प्रस्तुत स्वागत गीत से हुई, जिसके पश्चात पिंपले गुरव महिला मंडल ने प. पू. म. सा. के जीवन पर आधारित एक भावविभोर स्तवन प्रस्तुत किया। मंच संचालन की बागडोर अध्यक्ष दिलीप भंसाली ने संभाली।
इस पावन अवसर पर 130 तपस्वियों ने एकासना तप कर अपनी आत्मिक आराधना का परिचय दिया। कार्यक्रम की सफलता हेतु सतीश लुंकड़, सुनील कोठारी, आनंद बाफना, लीलाचंद लूणावत, तथा बहुमंडल व युवक मंडल ने विशेष परिश्रम किए।
इस विशेष आयोजन में रमणलाल लुंकड़, सुरेश गादिया, निर्मला छाजेड़ सहित कई गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही। सभी वक्ताओं ने एकमत होकर विश्वास व्यक्त किया कि, “यह चातुर्मास पुणे ही नहीं, पूरे जैन समाज के लिए एक आध्यात्मिक दृष्टि से ऐतिहासिक चातुर्मास सिद्ध होगा।”















