क्रोध, अहंकार और आलस्य ही शत्रु हैं : प. पू. प्रवीणऋषिजी म. सा.
महाराष्ट्र जैन वार्ता पुणे : समय के साथ होने वाला अपराध वह है जो समय की बर्बादी कहलाता है, जिसका न तो प्रायश्चित संभव है और न ही क्षमा प्राप्त की जा सकती है। ज्ञान की साधना में किया गया अपराध आलोचना, प्रतिगमन और प्रायश्चित से शुद्ध किया जा सकता है। किसी व्यक्ति के साथ … Read more