संसार में परिवर्तन अटल है : प. पू. प्रवीणऋषिजी म. सा.
महाराष्ट्र जैन वार्ता पुणे : परिवर्तन ही संसार का एकमात्र अपरिवर्तनशील नियम है। जो लोग समय के साथ परिवर्तन को स्वीकार करते हैं, वे निरंतर स्वयं में सुधार और विकास करते रहते हैं। लेकिन जो परिवर्तन को स्वीकार नहीं करते, जो समय की गति के साथ नहीं चलते – वे उसी कालखंड में खो जाते … Read more