जिज्ञासा में ही सौभाग्य छिपा है : प. पू. प्रवीणऋषिजी म. सा.
महाराष्ट्र जैन वार्ता पुणे : जो कुछ हमारे पास है, वह हमें इसलिए मिला है क्योंकि हमने उसे माँगा था। हम क्या माँगते हैं या कौन-सी इच्छा अपने मन में रखते हैं, उसी के अनुसार हमें प्राप्त होता है। अपने भीतर जिज्ञासा जगाना ही शिष्य बनने का पहला मार्ग है। जहाँ जिज्ञासा उत्पन्न नहीं होती, … Read more