अपने आप से संवाद करें : प. पु. प्रवीणऋषीजी म. सा.
महाराष्ट्र जैन वार्ता पुणे : संसार की भागदौड़ में हम अक्सर अपनी अंतरात्मा को भूल जाते हैं। भौतिक सुख में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि अपने आप से संवाद करना ही भूल जाते हैं। हम स्वयं की सान्निध्य से दूर हो जाते हैं। जीवन की असली संपत्ति बाहरी दुनिया में नहीं, बल्कि हमारे हृदय … Read more