जैसा खाओगे, वैसे बनोगे : प. पू. प्रवीणऋषिजी म. सा.
महाराष्ट्र जैन वार्ता पुणे : हम जैसा भोजन करते हैं, वैसा ही हमारा मन भी बनता है। जिस प्रकार के गुण भोजन में होते हैं, वही गुण हमारे व्यक्तित्व में उतरते हैं। हमारे स्वास्थ्य, विचारों और व्यवहार पर उसका सीधा प्रभाव पड़ता है। आप जैसे प्रकार का भोजन खाएँगे, वैसे ही बनते जाएँगे, ऐसा प्रतिपादन … Read more