राह भटकने नहीं देता वही गुरु : प. पू. प्रवीणऋषिजी म. सा.
महाराष्ट्र जैन वार्ता पुणे : हमारे जीवन में बनने वाले रिश्ते हम स्वयं तय नहीं करते, बल्कि वे अपने आप ही बन जाते हैं। इन रिश्तों के सूत्रधार हम नहीं होते, बल्कि वे कर्म और संयोग से हमसे जुड़ते हैं। यानी इन रिश्तों के माध्यम से दो जीवों का बंधन जुड़ता है। रिश्ते का मूल … Read more