रिश्तों में समर्पण और निःस्वार्थ भावना का महत्व : प. पु. प्रवीणऋषिजी म. सा.
महाराष्ट्र जैन वार्ता पुणे : प्यार और अपनापन से जो एक धागा जुड़ता है, उसे ही रिश्ता कहा जाता है। कुछ रिश्ते हमें जन्म से ही मिल जाते हैं, जबकि कुछ रिश्ते समय के साथ हमारे कर्मों और पिछले जन्मों के ऋणानुबंधों से बनते हैं। रिश्तों में विश्वास, पारदर्शिता और किसी के प्रति गहरी अपनत्व … Read more