जो है उसमें प्रसन्न रहो : प. पू. प्रवीणऋषिजी म. सा
महाराष्ट्र जैन वार्ता पुणे : जो मिला है उसमें प्रसन्नता माननी चाहिए और जो नहीं मिला उसके दुख में उलझे रहना नहीं चाहिए। उसे उसी क्षण छोड़ देना चाहिए। यदि मन में खटक बनाए रखी और बार-बार सोचते रहे तो निश्चित ही आपका निद्रानाश होगा, ऐसा प्रतिपादन प. पू. प्रवीण ऋषिजी म. सा. ने किया। … Read more