आवृत्ती , पुणे
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निद्रा एक वरदान : प. पू. प्रवीणऋषिजी म. सा.

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पुणे : प्रत्येक जीव को प्रकृति ने निद्रा का वरदान दिया है। इस निद्रा के कारण हमें नए दिन के लिए नई ऊर्जा प्राप्त होती है। जितना ध्यान हमें सोने पर देना चाहिए, उतना हम अपनी नींद की ओर नहीं देते। यहीं से हमारे स्वास्थ्य चक्र के बिगड़ने की शुरुआत होती है, ऐसा प्रतिपादन प. पू. प्रवीणऋषिजी म. सा. ने किया। वे परिवर्तन चातुर्मास 2025 के अंतर्गत आयोजित प्रवचन माला में बोल रहे थे।

प. पू. प्रवीणऋषिजी म. सा. ने कहा कि आजकल हर व्यक्ति के सामने सबसे बड़ी समस्या नींद की है। सामान्यतः सात से आठ घंटे की नींद शरीर के लिए आवश्यक है। लेकिन हम कितनी देर सोते हैं, इससे अधिक महत्त्वपूर्ण है कि नींद कैसी ली जाए। परमात्मा कहते हैं कि सोते समय ऐसी नींद लेनी चाहिए जैसे यह हमारा अंतिम श्वास हो।

अर्थात, शरीर और मन को प्रतिदिन ऐसी नींद मिलनी चाहिए जो पीड़ारहित और खेदरहित हो। प्रभु महावीर ने जीवन को संवारने के लिए बताया है कि हमारी चाल कैसी होनी चाहिए, बैठना कैसा हो, खड़ा होना कैसे हो, भोजन कैसे ग्रहण करना चाहिए, बोलना कैसे चाहिए, और इसके साथ ही नींद कैसी लेनी चाहिए, ऐसी छह क्रियाएँ बताई हैं।

इन क्रियाओं पर ध्यान देकर और आवश्यक परिवर्तन करके हम अपना जीवन और व्यक्तित्व अधिक सुंदर बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि इन छह सूत्रों में प्रभु महावीर ने “नींद” को विशेष महत्त्व दिया है। क्योंकि एक बार यदि नींद का क्रम बिगड़ गया, तो पूरे शरीर का संतुलन डगमगा जाता है।

निद्रा की क्रिया में मानसिक स्वास्थ्य अत्यंत महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि हमारा मन बहुत अस्थिर होता है। अगले क्षण वह क्या सोचेगा, यह हमें भी नहीं पता होता। इसलिए मन को स्थिर करने के लिए पर्याप्त नींद आवश्यक है। जैसे ध्यान में मन को स्थिरता मिलती है, वैसे ही नींद में भी विचलित मन को स्थिरता प्राप्त होती है।

हमारी मानसिक स्थिति जैसी होगी, वैसी ही हमारे मन में भावनाएँ उत्पन्न होंगी। हम क्या हैं और कैसे हैं, यह हमारे सोने के तरीके और स्थिति से पता चलता है। नींद में हमारी हलचल और करवट बदलने की स्थिति से यह समझा जा सकता है कि हम चंचल हैं, विक्षिप्त हैं या शांत हैं।

कभी-कभी ऐसा होता है कि हमें नींद आने पर ही हम उसके अधीन हो जाते हैं। लेकिन ऐसा न होकर हमें आदेशानुसार (हुक़्मी) नींद आनी चाहिए। यानी नींद हमें नियंत्रित करने के बजाय हमें नींद को अपने नियंत्रण में रखना चाहिए।

अन्यथा हमें केवल इंतज़ार करना पड़ेगा कि नींद कब आएगी। इसके लिए नींद का महत्त्व समझने का प्रयास करना चाहिए। नींद शरीर, मन और आत्मा को ताजगी प्रदान करती है। यह मानसिक तनाव में खर्च हुई ऊर्जा को पुनः भर देती है।

इसलिए उचित तरीके से और उचित समय पर नींद अवश्य लेनी चाहिए। नींद केवल शरीर की विश्रांति नहीं है, बल्कि यह मन, आत्मा और उनसे उत्पन्न होने वाले विचारों व भावनाओं का पुनर्निर्माण है।