वैश्विक भाग्य बदलने की क्षमता आपमें है – प. पू. प्रवीणऋषिजी म. सा.
महाराष्ट्र जैन वार्ता पुणे : “वैश्विक कर्म या भाग्य को बदला नहीं जा सकता, ऐसा कौन कहता है? वह सामर्थ्य और क्षमता तो आपमें ही है,” यह प्रेरणादायी वक्तव्य प. पू. प्रवीणऋषिजी म. सा. ने परिवर्तन 2025 चातुर्मास के अंतर्गत आयोजित प्रवचनमाला में अपने उद्बोधन के दौरान दिया। उन्होंने कहा कि हमें सभी को साथ … Read more