जो भी करो, वह ईश्वर के लिए करो : प. पू. प्रवीणऋषिजी म. सा.
महाराष्ट्र जैन वार्ता पुणे : प्रकृति में हर प्राणी को अनेक गुणों का वरदान मिला है। पहले मन-मन की भावनाएँ शब्दों के बिना ही समझी जाती थीं। लेकिन समय के साथ या फिर मनुष्य द्वारा किए गए बदलावों के कारण यह संवेदनशीलता कहीं न कहीं कम होती जा रही है। हमारे भीतर छिपा क्रोध और … Read more