बंधन तोड़ने वाले ही सच्चे पुरुषार्थी होते हैं : प. पू. प्रवीणऋषिजी म.सा.
महाराष्ट्र जैन वार्ता पुणे : बंधन कोई भी हो, चाहे वह परंपरा का बंधन हो, कानून का हो, सत्ता का हो या समय का बंधन हो, वह बंधन तोड़ना आना चाहिए। पशु बंधनों में जीते हैं, लेकिन बंधनों को तोड़ने वाले ही सच्चे पुरुषार्थी होते हैं, ऐसा प्रतिपादन प. पू. प्रवीणऋषिजी म.सा. ने किया। परिवर्तन … Read more