धर्म का अर्थ है आत्मशुद्धि का मार्ग : प. पू. प्रवीणऋषिजी म. सा.
महाराष्ट्र जैन वार्ता पुणे : धर्म का अर्थ केवल ध्यान करना, तपस्या करना, प्रतिक्रमण करना या त्याग करना नहीं होता, बल्कि यह आत्मशुद्धि का निर्मल और शांतिपूर्ण मार्ग है। ऐसा स्पष्ट और मर्मस्पर्शी प्रतिपादन प. पू. प्रवीणऋषिजी म. सा. ने किया। वे परिवर्तन चातुर्मास 2025 के अंतर्गत आयोजित प्रवचनमाला में संबोधित कर रहे थे। प. … Read more